भिंडी की खेती से बंपर मुनाफा: सिर्फ 5 हजार की लागत से राजू मौर्य कमा रहे 60 हजार रुपये उत्तर प्रदेश 2 घंटे पहले 5
गोंडा के प्रगतिशील किसान राजू मौर्य ने भिंडी की खेती में नई मिसाल पेश की है। वे वैज्ञानिक तरीकों और सही किस्म के चयन से कम लागत में बेहतरीन मुनाफा कमा रहे हैं।

खेती में मुनाफे का गणित

आज के दौर में परंपरागत खेती के साथ सब्जियों की बुवाई किसानों के लिए कमाई का एक शानदार जरिया बनती जा रही है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के निवासी किसान राजू मौर्य ने भिंडी की खेती को अपनाकर यह साबित कर दिया है कि सही नियोजन और सही किस्म का चुनाव करने पर छोटे किसान भी बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं। राजू मौर्य के अनुसार, एक बीघा जमीन पर भिंडी की फसल तैयार करने में कुल खर्च लगभग 5,000 रुपये आता है, जबकि छह महीने की अवधि में इससे 50 से 60 हजार रुपये तक की आमदनी आसानी से हो जाती है।

फसल की बुवाई और उत्पादन की प्रक्रिया

राजू मौर्य ने अपनी भिंडी की फसल की शुरुआत मई के महीने में की थी। भिंडी की खासियत यह है कि बुवाई के 50 से 60 दिन के भीतर ही पौधे फल देने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। एक बार जब फल आने शुरू हो जाते हैं, तो नियमित अंतराल पर इनकी तुड़ाई की प्रक्रिया चलती रहती है। राजू का अनुभव है कि हर तीसरे दिन वे अपने खेत से 50 से 60 किलो भिंडी की तुड़ाई कर रहे हैं। तोड़ी गई ताजी भिंडी को वह गोंडा की स्थानीय मंडी में बिक्री के लिए ले जाते हैं, जहां उन्हें इसका उचित दाम मिल जाता है।

जैविक खाद पर जोर

अच्छी पैदावार के पीछे के रहस्यों के बारे में बताते हुए राजू कहते हैं कि मिट्टी की तैयारी और पोषण प्रबंधन ही सफलता की कुंजी है। वे अपने खेत में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग न्यूनतम रखते हैं और इसके बजाय जैविक खाद को अधिक प्राथमिकता देते हैं। खेत की उर्वरता बनाए रखने के लिए वे मुख्य रूप से सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करते हैं, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य लंबे समय तक बेहतर बना रहता है। इसके अलावा, भिंडी की खेती के लिए जल निकासी की उत्तम व्यवस्था होना अनिवार्य है। समय पर सिंचाई और फसल की निरंतर देखरेख ही पौधे को स्वस्थ और फलदायी बनाए रखती है।

राधिका किस्म का कमाल

राजू मौर्य की सफलता का एक बड़ा श्रेय उनके द्वारा चुनी गई फसल की वैरायटी को जाता है। उन्होंने गोल्डन कंपनी की राधिका किस्म की भिंडी का चयन किया है। राजू बताते हैं कि यह किस्म गोंडा की जलवायु और मिट्टी के अनुकूल है, जिससे इसका उत्पादन काफी अच्छा हो रहा है। पौधों में लगातार फल आते रहते हैं, जिसके कारण उन्हें बार-बार तुड़ाई का अवसर मिलता है। वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि भिंडी की समय पर तुड़ाई करना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे पौधों पर नई फलियां आने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। फसल की कुल अवधि और उत्पादन का स्तर मौसम की स्थिति, देखभाल के तरीके और बीज की गुणवत्ता पर भी निर्भर करता है।

एक प्रेरणादायक सफर

राजू मौर्य की कहानी उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो खेती के प्रति रुचि रखते हैं। राजू ने इंटरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त की है और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह से कृषि क्षेत्र को ही अपने करियर के रूप में चुना। बचपन से ही खेती-किसानी के प्रति उनका लगाव उन्हें आज एक सफल किसान के रूप में स्थापित कर चुका है। उनका दृढ़ मानना है कि यदि कोई किसान वैज्ञानिक तरीके अपनाए, बाजार की मांग को समझे और सही फसल का चुनाव करे, तो खेती किसी भी अन्य पेशे से कम फायदेमंद नहीं है। उनकी मेहनत और समझदारी आज अन्य किसानों के लिए भी एक मार्गदर्शक साबित हो रही है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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