मेरठ सौरभ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी के साथ क्यों मिली 7 साल की अतिरिक्त सजा, क्या है पूरा कानूनी पेच? उत्तर प्रदेश 8 घंटे पहले 2
मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने दोषियों को न केवल फांसी की सजा सुनाई है, बल्कि सबूत मिटाने के जुर्म में अलग से कारावास और जुर्माने का भी दंड दिया है।

फैसले की अनसुलझी कानूनी बारीकियां

मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने अपना फैसला सुनाते हुए दोषियों, मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को कड़ा दंड दिया है। मामले की सबसे खास बात यह है कि अदालत ने दोनों को केवल फांसी की सजा ही नहीं दी, बल्कि उन्हें सात-सात साल की अतिरिक्त सजा और भारी जुर्माने का भी सामना करना पड़ेगा। आम तौर पर फांसी की सजा सुनने के बाद लोग अन्य सजाओं के बारे में उलझन में रहते हैं, लेकिन भारतीय न्याय संहिता की प्रक्रियाओं में यह कानूनी रूप से स्पष्ट है कि एक ही घटना में शामिल विभिन्न अपराधों के लिए अलग-अलग दंड दिए जाते हैं।

हत्या और साक्ष्यों से छेड़छाड़ के लिए अलग दंड

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सौरभ हत्याकांड में दो मुख्य अपराध हुए थे। पहला, सुनियोजित तरीके से हत्या करना और दूसरा, उस हत्या से संबंधित सबूतों को नष्ट करने का प्रयास करना। अदालत ने इन दोनों कृत्यों को अलग-अलग श्रेणी में रखा है।

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और धारा 3(5): इस धारा के तहत हत्या का अपराध सिद्ध होने पर दोनों दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। इसके अतिरिक्त, उन पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। हालांकि, यह मृत्युदंड उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही प्रभावी होगा।
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 238(a): सबूतों को मिटाने या साक्ष्य छिपाने के अपराध के लिए अदालत ने दोनों को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा दी है।

जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त सजा

अदालत ने आर्थिक दंड के रूप में भी दोषियों पर नकेल कसी है। सबूत मिटाने के जुर्म में दोषी मुस्कान और साहिल को 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी भरना होगा। यदि दोषी इस जुर्माना राशि को जमा करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें एक-एक महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी।

कानून की नजर में अलग अपराध क्यों?

इस पूरे मामले को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि कानून में किसी भी घटना के दौरान किए गए विभिन्न कार्यों को अलग-अलग अपराध माना जाता है। हत्या करना एक जघन्य अपराध है जिसके लिए कानून में सबसे बड़ी सजा का प्रावधान है, वहीं अपराध के सबूतों को मिटाकर जांच को गुमराह करना एक अलग कानूनी धारा के अंतर्गत आता है। चूंकि मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला ने हत्या के साथ-साथ साक्ष्यों को नष्ट करने का काम भी किया था, इसलिए जज अरविंद कुमार मिश्रा ने कानून की संबंधित धाराओं के तहत उन्हें दोहरी सजा सुनाई है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि अपराध की हर कड़ी के लिए दोषियों को अलग-अलग जवाबदेह ठहराया जाएगा।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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