EC दफ्तर के बाहर NSUI का प्रदर्शन, नारेबाजी करते कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया; नटराजन का पर्चा रद्द होने पर भड़का गुस्सा भारत 2 घंटे पहले 3
मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद दिल्ली में चुनाव आयोग दफ्तर के सामने NSUI ने प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के बाद राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय के सामने पटेल चौक पर कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के जवान कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर ले जाते नजर आए। इस मौके पर NSUI कार्यकर्ताओं ने जमकर नारेबाजी की, जिसका वीडियो भी सामने आया है।

नारेबाजी करते कार्यकर्ताओं को पुलिस ने उठाया

सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि मीनाक्षी नटराजन का पर्चा रद्द होने से नाराज NSUI कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे हैं। इसी बीच पुलिस के जवान मौके पर पहुंचते हैं और उन्हें पकड़ लेते हैं। इसके बाद प्रदर्शनकारियों को पुलिस की वैन में बैठाकर पटेल चौक से दूर ले जाया जाता है।

मामला लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस

दूसरी ओर, चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराने के बाद कांग्रेस शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। पार्टी की ओर से रिटर्निंग ऑफिसर के निर्णय को शीर्ष अदालत में चुनौती देते हुए उसे रद्द किए जाने की मांग रखी गई। इससे पहले गुरुवार को कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की थी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली। उल्लेखनीय है कि बीजेपी ने मीनाक्षी नटराजन पर एक लंबित मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया था, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया।

चुनाव आयोग के सामने रखा गया नटराजन का पक्ष

हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ वकीलों ने शुक्रवार को दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष भी मीनाक्षी नटराजन का पक्ष प्रस्तुत किया। आयोग को बताया गया कि भोपाल में रिटर्निंग ऑफिसर ने गैरकानूनी ढंग से एकतरफा फैसला सुनाया है। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि जिस मामले को आधार बनाकर नटराजन का नामांकन खारिज किया गया, उस मामले का अब तक अदालत ने भी संज्ञान नहीं लिया है। ऐसे में कानून के अनुसार उस मामले की जानकारी शपथपत्र में देना अनिवार्य नहीं था।

आयोग ने एफिडेविट की कमियों को बताया गंभीर

अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें सुनने के बाद चुनाव आयोग ने कहा कि नामांकन के शपथपत्र में रह गई कमियां गंभीर विषय हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आयोग के इस रुख से सिंघवी असहज नजर आए। उन्होंने कहा कि जो बात कानून में स्पष्ट रूप से लिखी है, अगर चुनाव आयोग उसे भी देखने को तैयार नहीं है तो यह लोकतंत्र के साथ मजाक है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस इस मामले को यूं ही नहीं छोड़ेगी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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