अमरूद की खेती पर फल मक्खी का संकट, फसल बचाने के लिए किसान बरतें ये सावधानियां राजस्थान एक घंटा पहले 2
बरसात के मौसम में भरतपुर जिले के वेर और भुसावर में अमरूद के बागों में फल मक्खी का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे फसल खराब होने का डर है। कृषि विभाग ने किसानों को कीट नियंत्रण के लिए विशेष उपाय और दवाओं के छिड़काव के निर्देश दिए हैं।

अमरूद के बागों पर मंडरा रहा है कीटों का खतरा

बरसात का मौसम आमतौर पर फसलों की सिंचाई और विकास के लिए लाभदायक माना जाता है, लेकिन यह कई बार किसानों के सामने नई मुसीबतें भी लेकर आता है। हाल ही में राजस्थान के भरतपुर जिले के वेर और भुसावर क्षेत्रों से आई रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ अमरूद की फसल पर फल मक्खी का गंभीर हमला देखा जा रहा है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो बाग के बाग बर्बाद हो सकते हैं और किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत बेकार जा सकती है।

किस तरह नुकसान पहुँचाती है फल मक्खी

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, फल मक्खी एक अत्यंत खतरनाक कीट है जो अमरूद को अंदर ही अंदर खोखला कर देती है। यह कीट कच्चे अमरूद के फलों के अंदर अपने अंडे दे देती है। इन अंडों से जो लार्वा निकलता है, वह फल के भीतर पनपता है और उसे अंदर से सड़ाने लगता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि बाहर से देखने पर फल सामान्य और स्वस्थ नजर आता है, लेकिन वास्तव में वह पूरी तरह से नष्ट हो चुका होता है। इसके अलावा, यह मक्खी पेड़ों की पत्तियों पर भी हमला करती है, जिससे पौधों के बढ़ने की प्रक्रिया यानी विकास रुक जाता है।

कृषि अधिकारियों की सलाह और निगरानी

कृषि विभाग के अधिकारी जनक राज मीणा ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए किसानों को सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने बताया कि अगर इस रोग को शुरुआती चरण में नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह तेजी से पूरे बाग में फैल सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने खेतों में लगातार निगरानी बनाए रखें। यदि किसी फल में संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे तुरंत तोड़कर नष्ट कर देना चाहिए ताकि यह संक्रमण दूसरे स्वस्थ फलों तक न पहुँच सके।

फसल को सुरक्षित रखने के प्रभावी उपाय

विशेषज्ञों ने अमरूद के बागों को बचाने के लिए कुछ तकनीकी और रासायनिक उपाय सुझाए हैं, जिन्हें अपनाकर किसान नुकसान को कम कर सकते हैं:

  • मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप: किसान अपने बागों में मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप का उपयोग करें। यह फल मक्खी को अपनी ओर आकर्षित करता है, जिससे उन्हें पकड़कर नियंत्रित करना आसान हो जाता है।
  • दवाओं का छिड़काव: रसायनिक उपचार के रूप में स्पिनोसैड की मात्रा 1 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा, 1 मिली प्रति लीटर पानी के अनुपात में मैलाथियान का छिड़काव भी असरदार है।
  • दोहराव का समय: आवश्यकता को देखते हुए इन दवाओं के छिड़काव को 10 से 15 दिन के अंतराल पर दोबारा किया जा सकता है।
  • स्वच्छता का महत्व: जमीन पर गिरे हुए और संक्रमित फलों को खेत में खुला न छोड़ें। इन्हें इकट्ठा करके या तो गहरे गड्ढे में दबा देना चाहिए या पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए। इससे कीटों का प्रजनन चक्र टूटता है।
  • बाग की सफाई: बाग में नियमित साफ-सफाई रखना भी कीटों के फैलाव को रोकने का एक महत्वपूर्ण तरीका है।

कृषि विभाग का स्पष्ट संदेश है कि सावधानी ही बचाव का सबसे बड़ा जरिया है। यदि किसान बताए गए इन निर्देशों का पालन समय पर करते हैं, तो वे अपनी फसल को सुरक्षित रखने के साथ-साथ बेहतर पैदावार भी प्राप्त कर सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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