उज्जैन: महाकाल मंदिर में मिले सोने-चांदी के दान का होगा फिजिकल वेरिफिकेशन, महापौर ने कलेक्टर को लिखा पत्र मध्य प्रदेश 3 महीने पहले 123
उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने महाकालेश्वर मंदिर में आने वाले कीमती दान की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर फिजिकल वेरिफिकेशन की मांग की है।

दान की सुरक्षा और पारदर्शिता पर जोर

विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में दुनिया भर से आने वाले भक्त श्रद्धा के साथ सोना, चांदी और अन्य कीमती आभूषण अर्पित करते हैं। इन चढ़ावों की सुरक्षा और उनके सही उपयोग को लेकर उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष और जिला कलेक्टर को एक आधिकारिक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने मांग की है कि मंदिर में जमा स्वर्ण और रजत आभूषणों की पूरी पारदर्शिता के साथ भौतिक सत्यापन यानी फिजिकल वेरिफिकेशन किया जाए, ताकि इन बहुमूल्य सामग्रियों का बेहतर प्रबंधन संभव हो सके।

रुकी हुई प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने की कवायद

मुकेश टटवाल ने 29 जून को भेजे गए अपने पत्र में स्पष्ट किया कि भगवान महाकाल के भक्तों द्वारा चढ़ाई गई हर सामग्री का हिसाब-किताब पूरी तरह व्यवस्थित और पारदर्शी होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि इससे पहले भी मंदिर प्रबंध समिति की ओर से एक विशेष समिति बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य दान में मिली कीमती धातुओं का मूल्यांकन करना और उन्हें मंदिर की उन्नति के लिए काम में लाना था। उस समय महापौर स्वयं भी इस समिति का हिस्सा थे और तत्कालीन कलेक्टर द्वारा सामग्रियों की सूची भी साझा की गई थी। हालांकि, चुनाव आचार संहिता के लागू होने के कारण यह पूरी प्रक्रिया बीच में ही ठप हो गई थी और तय किए गए कार्यों पर अमल नहीं हो पाया था। महापौर का मानना है कि अब इस जरूरी काम को फिर से पटरी पर लाने का समय आ गया है।

दान का सदुपयोग है मुख्य उद्देश्य

महापौर ने हालांकि यह स्वीकार किया है कि वर्तमान में मंदिर में दान के रिकॉर्ड को संभालने की व्यवस्था सुचारू है, लेकिन उन्होंने इस बात पर बल दिया कि रुकी हुई प्रक्रिया को पुनर्जीवित करना आज के समय की बड़ी आवश्यकता है। इस समिति का मुख्य लक्ष्य केवल दान की वस्तुओं की गिनती करना नहीं है, बल्कि यह योजना तैयार करना भी है कि मंदिर के भंडार में रखे सोना, चांदी, पीतल और अन्य कीमती धातुओं का उपयोग किस प्रकार जनहित या मंदिर के विकास कार्यों में प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र इस दान का पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ सदुपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि मंदिर की व्यवस्थाएं और भी अधिक पारदर्शी और मजबूत बन सकें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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