प्रेमानंद महाराज के आश्रम में हुई मौत पर अनिरुद्धाचार्य ने दिया बड़ा बयान, मीडिया और ट्रोलर्स पर बरसे
उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
7
विचारों
प्रेमानंद महाराज के समर्थन में उतरे अनिरुद्धाचार्य
वृंदावन स्थित श्रीहित राधा केलि कुंज आश्रम में रसिक दुलारी शरण नाम के एक साधक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे पर अब प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और प्रेमानंद महाराज का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने अपनी कथा के दौरान आश्रम और महाराज जी पर सवाल उठाने वाले लोगों को आड़े हाथों लिया है।
मीडिया और सोशल मीडिया की आलोचना
अनिरुद्धाचार्य ने अपने संबोधन में स्पष्ट रूप से कहा कि आज के दौर में कुछ लोग केवल टीआरपी और व्यूज हासिल करने के लिए संतों की छवि को धूमिल कर रहे हैं। उन्होंने मीडिया के एक वर्ग पर निशाना साधते हुए कहा कि बिना किसी ठोस तथ्य या जांच के खुद जज बनकर फैसले सुनाना अनुचित है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही तमाम अफवाहों और भ्रामक वीडियो को लेकर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोग विषय की गहराई को समझे बिना ही संतों पर आरोप लगा रहे हैं, जो कि पूरी तरह से गलत है।
संतों को जिम्मेदार ठहराना अनुचित
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अनिरुद्धाचार्य ने सवाल किया कि भला किसी की मृत्यु के लिए एक संत को जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है? उन्होंने कहा कि इस संसार में हर व्यक्ति का एक निश्चित समय पर जाना तय है। उन्होंने तर्क दिया कि जीवन और मृत्यु के चक्र में किसी संत को दोषी करार देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह सनातन परंपरा के प्रति भी गलत नजरिया है। उन्होंने प्रेमानंद महाराज के त्याग का उल्लेख करते हुए बताया कि वे स्वयं गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनकी दोनों किडनियां खराब हैं, इसके बावजूद वे निरंतर समाज और धर्म के कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं।
सनातन धर्म और संतों का सम्मान
अनिरुद्धाचार्य ने जोर देकर कहा कि प्रेमानंद महाराज ने करोड़ों लोगों को सनातन धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है। उन्होंने इसे विनाश काले विपरीत बुद्धि करार देते हुए कहा कि संतों को बेवजह परेशान करना और उनका अपमान करना सबसे बड़ा पाप है। उन्होंने अपने अनुयायियों और आम जनता से अपील की कि वे इस तरह की अफवाहों पर बिल्कुल भी ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि संतों के प्रति श्रद्धा और मर्यादा बनाए रखना ही हर भक्त का पहला कर्तव्य है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बिना तथ्यों के संतों के खिलाफ जहर उगलने वालों को अपनी मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और इस तरह की नकारात्मकता फैलाने से बचना चाहिए।
Comments
0 comment