बिहार
2 महीने पहले
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सिरहा टोला गांव में दहला देने वाला हादसा
बिहार के शिवहर जिले के अंतर्गत आने वाले तरियानी छपरा थाना क्षेत्र के सिरहा टोला गांव में रविवार को एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां एक रिहायशी मकान में रसोई गैस सिलेंडर में जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद आग ने विकराल रूप ले लिया। यह आग इतनी तेजी से फैली कि पलक झपकते ही इसने आसपास के 8 घरों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया। स्थानीय लोगों के अनुसार धमाका इतना शक्तिशाली था कि किसी को संभलने या अपना सामान बाहर निकालने का मौका तक नहीं मिल सका। इस आगजनी में अनाज, कीमती कपड़े, फर्नीचर, रसोई के बर्तन और नकदी समेत गृहस्थी का सारा सामान जलकर पूरी तरह राख हो गया है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और दमकल की मशक्कत
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीण मदद के लिए दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर साहस का परिचय दिया और घरों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। साथ ही तुरंत इसकी जानकारी पुलिस और अग्निशमन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं। ग्रामीणों और दमकलकर्मियों की घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी और लाखों रुपये की संपत्ति जलकर स्वाहा हो गई थी।
दो घायलों की हालत बेहद नाजुक
इस हादसे में कुल 6 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम घायलों का उपचार कर रही है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि 2 लोगों की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
प्रशासन ने लिया जायजा और मदद का दिया आश्वासन
घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम अविनाश कुणाल ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और स्थिति का मुआयना किया। उन्होंने पुष्टि की है कि सिलेंडर फटने से 8 घर पूरी तरह तबाह हो गए हैं और 6 लोग घायल हुए हैं। प्रशासन फिलहाल इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर सिलेंडर में धमाका किन परिस्थितियों में हुआ। एसडीएम ने अग्नि पीड़ित परिवारों को सरकारी नियमों के तहत हर संभव आर्थिक मदद और अनुदान राशि मुहैया कराने का वादा किया है। राजस्व विभाग के अधिकारियों को जल्द से जल्द नुकसान का सटीक आकलन करने का निर्देश दिया गया है। फिलहाल पीड़ित परिवार बेघर हो गए हैं और खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं, जिन्हें प्रशासन द्वारा जल्द से जल्द राहत पहुंचाने का भरोसा दिया गया है।
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