राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील: अब महीनों की नहीं, हफ्तों की बात
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए अपने विशेष साक्षात्कार में दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित व्यापारिक समझौते पर बड़ा अपडेट दिया है। रूबियो ने स्पष्ट किया कि अब भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील महज कुछ हफ्तों की दूरी पर है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में अब केवल कुछ तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाना शेष है। अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार, यह समझौता भारत के लिए टैरिफ दरों में काफी राहत लेकर आएगा और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। रूबियो ने जोर देकर कहा कि इस बड़े समझौते में जल्दबाजी के बजाय हर छोटी तकनीकी बारीकी पर सहमति बनाना आवश्यक है ताकि भविष्य में किसी भी तरह का विवाद न हो।
रूस से तेल खरीद और अमेरिकी रणनीति का बचाव
रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत पर पड़ने वाले दबाव और अमेरिका के रुख को लेकर पूछे गए सवाल पर रूबियो ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में जारी संघर्ष अब पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है, जो एक वैश्विक चुनौती है। रूबियो ने तर्क दिया कि अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर दुनिया भर के देशों पर पड़ता है, इसलिए वाशिंगटन को एक संतुलित विदेश नीति अपनानी पड़ती है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने नेशनल सिक्योरिटी वेवर का उपयोग सोच-समझकर किया है, ताकि वैश्विक आर्थिक स्थिरता बनी रहे और भारत जैसे मित्र देशों पर इसका नकारात्मक असर न पड़े। उनका मानना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील से उपजे तनाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।
पाकिस्तान पर रुख और क्षेत्रीय सुरक्षा
जब राहुल जोशी ने पाकिस्तान के संदर्भ में रूबियो से उनके पुराने रुख के बारे में पूछा, तो उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी का जिक्र किया। रूबियो ने कहा कि एक सीनेटर के रूप में उनका नजरिया अलग था, लेकिन अब विदेश मंत्री के तौर पर उन्हें व्यापक भू-राजनीतिक हितों को देखना होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु हथियारों से लैस होने और भौगोलिक स्थिति के कारण पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंध बनाए रखना अमेरिका की आवश्यकता है। रूबियो ने विश्वास जताया कि पाकिस्तान के साथ संवाद बनाए रखकर अमेरिका भारत की सुरक्षा चिंताओं को सुलझाने में भी अपनी भूमिका निभा सकता है, जो पूरे दक्षिण एशिया के लिए सकारात्मक होगा।
ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की गतिविधियों पर रूबियो ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरानी शासन कट्टरपंथी सोच से प्रेरित है और उनके साथ समझौता करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान कमर्शियल जहाजों और नाविकों को निशाना बनाकर नाजी स्टाइल वाली रणनीति अपना रहा है। रूबियो ने बताया कि अमेरिका हर रात जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है और कई ड्रोन व मिसाइलों को नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि इन हमलों में भारतीय नाविकों को भी नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिका इस मुद्दे पर ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
क्वाड और भविष्य की कार्ययोजना
क्वाड (QUAD) लीडर्स समिट के बारे में रूबियो ने स्पष्ट संकेत दिए कि यह बैठक इस साल के अंत से पहले आयोजित होगी। उन्होंने बताया कि इसे मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान करने पर सहमति बनी है। रूबियो ने याद दिलाया कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बड़ी बैठक क्वाड के समकक्षों के साथ ही हुई थी और तब से यह मंच लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि अब क्वाड केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर ठोस नतीजों के साथ काम कर रहा है। आने वाली समिट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की उम्मीद है।
मुंबई दौरा और रिलायंस के साथ तालमेल
इस बार भारत दौरे के दौरान मुंबई और जामनगर को चुनने के कारणों पर रूबियो ने कहा कि किसी देश को समझने के लिए केवल राजधानी देखना काफी नहीं है। उन्होंने मुंबई को भारत की आर्थिक जीवनरेखा और वित्तीय दिल बताया। जामनगर यात्रा के बारे में उन्होंने कहा कि रिलायंस जैसी कंपनियां ऊर्जा रिफाइनिंग के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला जैसे देशों से कच्चे तेल के उत्पादन और भारत के रिफाइनिंग अनुभव को जोड़कर ऊर्जा सुरक्षा के नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं। रूबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों ने पिछले डेढ़ वर्षों में कई संवेदनशील मुद्दों पर मिलकर काम किया है, जो आने वाले समय में और मजबूत होगा।
नफरत और सामाजिक सद्भाव
अमेरिका में हिंदू मंदिरों पर हमले की साजिश और नस्लीय भेदभाव से जुड़े सवाल पर रूबियो ने कहा कि अज्ञानता और नफरत हर समाज का हिस्सा है, लेकिन अमेरिका में बहुसंख्यक आबादी ऐसी घटनाओं का विरोध करती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में भारतीय समुदाय का योगदान सराहनीय है और प्रशासन ऐसी किसी भी नफरत को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाता है। रूबियो ने कहा कि समाज एकजुट होकर ऐसे तत्वों को खारिज करता है, जैसा कि अतीत में सिख समुदाय के साथ हुई घटनाओं के दौरान भी देखने को मिला था।
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