हिमाचल प्रदेश
एक घंटा पहले
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नशा मुक्ति के लिए उठाई नई आवाज
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से एक बेहद प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहाँ नशाखोरी पर लगाम लगाने के लिए एक जन प्रतिनिधि ने अनूठी मुहिम शुरू की है। जोगिंदर नगर उपमंडल के अंतर्गत आने वाले टिकरू वार्ड के बीडीसी सदस्य दलीप सिंह ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने घोषणा की है कि जो परिवार अपनी बेटी की शादी में शराब नहीं परोसेंगे, उन्हें वह अपनी ओर से 11 हजार रुपये का शगुन देंगे। यह पूरी राशि वह अपने निजी संसाधनों यानी भारतीय सेना से मिलने वाली अपनी पेंशन से खर्च करेंगे। इस अभियान की आधिकारिक शुरुआत आगामी 12 अगस्त को होने वाली एक शादी से की जाएगी।
समाज से नशा मिटाने का संकल्प
दलीप सिंह ने यह निर्णय हाल ही में मेण भरोला पंचायत में आयोजित ग्राम सभा की बैठक के दौरान लिया। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में पिछले कुछ समय से शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में शराब का चलन काफी बढ़ गया है। यह न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि इससे आम परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ भी पड़ता है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए शादियों में शराब का प्रबंध करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इन हालातों को देखते हुए उन्होंने समाज को नशे की इस कुरीति से दूर करने और लोगों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव को कम करने का यह संकल्प लिया है।
सेना की पेंशन से करेंगे समाज सेवा
दलीप सिंह का व्यक्तित्व अनुशासित और सेवाभावी रहा है। बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की गतिविधियों में सक्रिय रहे दलीप सिंह वर्तमान में सेवा भारती के साथ जुड़कर समाज कल्याण के कार्यों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने अपनी दरियादिली दिखाते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि बीडीसी सदस्य के तौर पर मिलने वाले पूरे पांच साल के मानदेय को भी वह सेवा भारती के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की मदद में लगाएंगे। अपनी सेना की पेंशन का एक हिस्सा नेक काम में लगाने के उनके इस निर्णय की हर तरफ तारीफ हो रही है।
पंचायत प्रतिनिधियों ने की सराहना
स्थानीय स्तर पर दलीप सिंह के इस कदम का काफी सकारात्मक स्वागत किया गया है। मेण भरोला ग्राम पंचायत के प्रधान संजय जम्वाल और टिकरू पंचायत के प्रधान अनिल कुमार ने इस पहल को अनुकरणीय बताया है। पंचायत प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि समाज के अन्य लोग भी इस तरह का साहस दिखाएं, तो देवभूमि हिमाचल प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का सपना जल्द ही साकार हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह न केवल एक वित्तीय प्रोत्साहन है, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का एक बड़ा संदेश भी है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए नजीर बनेगा। यह मुहिम अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इस बात की उम्मीद कर रहे हैं कि इससे शादी समारोहों में शराब परोसने की परंपरा पर लगाम लगेगी।
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