प्रतापगढ़ में ढहा 100 साल पुराना मकान, 6 लोगों की मौत के बाद जागे अफसर, 451 जर्जर मकानों पर चला बुलडोजर उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 3
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में मूसलाधार बारिश के दौरान एक जर्जर मकान गिरने से एक ही परिवार के छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद हरकत में आए प्रशासन ने जिले भर के 451 खतरनाक मकानों को चिन्हित कर विशेष अभियान छेड़ दिया है।

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में भीषण हादसा

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के महुली इलाके में गुरुवार की भोर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। भारी बारिश के चलते करीब 100 साल पुराना एक जर्जर मकान अचानक भरभराकर गिर गया। मलबे के नीचे दबने से एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में 60 साल के बुजुर्ग से लेकर दो साल का बच्चा और छह महीने का मासूम भी शामिल था। हादसा रात के अंधेरे में हुआ, जिसके चलते प्रशासन को तुरंत बचाव कार्य शुरू करना पड़ा। राहत और बचाव की टीमें रात के ढाई बजे मौके पर पहुंच गई थीं। दोपहर तक सभी शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। शासन की ओर से पीड़ित परिवार को 26.20 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की मंजूरी दी गई है।

प्रशासन का सात दिवसीय विशेष अभियान

इस हादसे ने जिला प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद अब जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए प्रशासन ने अगले सात दिनों का एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान के अंतर्गत पूरे जिले में 451 ऐसे मकानों की पहचान की गई है, जो बेहद जर्जर और खतरनाक स्थिति में हैं। हादसे में जान गंवाने वालों में प्रमोद श्रीवास्तव, रीता, नितिन, माधुरी, माधव और अद्विक के नाम शामिल हैं। गनीमत रही कि परिवार के सदस्य अमन, जिनकी उम्र 28 वर्ष है, सुरक्षित बच गए। उन्हें मलबे से सही सलामत बाहर निकाल लिया गया और वर्तमान में वे पूरी तरह स्वस्थ हैं।

डीएम ने दी बचाव कार्यों की जानकारी

प्रतापगढ़ के जिलाधिकारी अभिषेक पांडे ने इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि लोगों की सुरक्षा प्रशासन की पहली प्राथमिकता है। युद्धस्तर पर चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 304 से अधिक निवासियों को उनके खतरनाक घरों से निकालकर रैन बसेरों और अन्य सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया है। शहरी क्षेत्रों में जो लोग अभी भी जर्जर मकानों में रह रहे हैं, उन्हें समझा-बुझाकर वहां से शिफ्ट करने की प्रक्रिया जारी है। जिलाधिकारी अभिषेक पांडे का कहना है कि 451 चिन्हित इमारतों को खाली कराना अनिवार्य है ताकि किसी भी अनहोनी को होने से टाला जा सके। प्रशासन का प्रयास है कि अगले एक हफ्ते के भीतर सभी जोखिम वाली जगहों को पूरी तरह खाली करा लिया जाए।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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