Mahasamund में पुष्पा स्टाइल में खैर लकड़ी की तस्करी का भंडाफोड़, 23 टन लकड़ी के साथ ट्रक ज़ब्त छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 27
Mahasamund में पुलिस और साइबर सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से ले जाई जा रही 23 टन खैर लकड़ी ज़ब्त की है। लकड़ी को तिरपाल के नीचे छिपाकर तस्करी की जा रही थी।

अवैध तस्करी पर बड़ी कार्रवाई

Mahasamund जिले में पुलिस और साइबर सेल की टीम ने खैर लकड़ी की तस्करी के एक बड़े प्रयास को नाकाम कर दिया है। अधिकारियों ने तलाशी के दौरान 23 टन बहुमूल्य खैर लकड़ी से लदा हुआ एक ट्रक पकड़ा है। लकड़ी को बाहर से तिरपाल से ढका गया था ताकि किसी को शक न हो, लेकिन पुलिस की सतर्कता के चलते आरोपी पकड़े गए।

हरियाणा भेजा जा रहा था खेप

जब्त किए गए ट्रक में छत्तीसगढ़ का रजिस्ट्रेशन नंबर है। पूछताछ के दौरान चालक ने दावा किया कि वह इस लकड़ी को रायपुर ले जा रहा था, हालांकि सूत्रों का कहना है कि लकड़ी की यह बड़ी खेप असल में हरियाणा भेजी जा रही थी। बरामद की गई सामग्री को अब वन विभाग के हवाले कर दिया गया है।

बाजार में लकड़ी की भारी मांग

खैर की लकड़ी का इस्तेमाल मुख्य रूप से कत्था बनाने के लिए किया जाता है, जिसका उपयोग पान मसाला और अन्य उत्पादों में होता है। सूत्रों के अनुसार, इस लकड़ी के व्यापार का गणित कुछ इस प्रकार है:

  • खैर लकड़ी की खरीद कीमत लगभग 18 से 20 रुपए प्रति किलो है।
  • बाजार में इसकी बिक्री 220 से 250 रुपए प्रति किलो तक होती है।

जांच में जुटी टीम

पिथौरा वन विभाग के SDO DP Bais ने बताया कि विभाग को यह मामला संज्ञान में मिला है और फिलहाल जांच जारी है। चालक से पूछताछ के आधार पर इस तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस और वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि अवैध रूप से काटी गई यह लकड़ी कहां से लाई गई थी और इसमें कौन सा गिरोह शामिल है। जांच पूरी होने के बाद इसमें शामिल सभी लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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