महाराष्ट्र
2 महीने पहले
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विचारों
महाराष्ट्र के सियासी गलियारों से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) यानी NCP-SP का कांग्रेस में विलय होने की तमाम अटकलों पर खुद पार्टी प्रमुख शरद पवार ने विराम लगा दिया है। पिछले कुछ दिनों से मीडिया और राजनीतिक हलकों में इस बात की पुरजोर चर्चा थी कि शरद पवार अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर सकते हैं। लेकिन अब शरद पवार ने इन सभी कयासों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनकी पार्टी का वजूद अलग रहेगा।
शरद पवार ने मीडिया के सामने स्थिति साफ करते हुए कहा कि न तो हमारी पार्टी में किसी भी तरह की कोई टूट होने जा रही है और न ही हमारी पार्टी का कांग्रेस में विलय होगा। इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही तमाम अफवाहों पर फिलहाल पूर्णविराम लग गया है।
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार का दावा और विवाद
दरअसल, इस पूरे विवाद और चर्चा की शुरुआत कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के बयान से हुई थी। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया था कि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का बहुत जल्द ही कांग्रेस पार्टी में विलय होने जा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा था कि इस विलय की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए देश की राजधानी दिल्ली में पार्टी आलाकमान के साथ वरिष्ठ नेताओं की महत्वपूर्ण बैठकें भी चल रही हैं। विजय वडेट्टीवार के इस बड़े दावे के बाद से ही महाराष्ट्र में नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर कयासबाजी तेज हो गई थी, जिसे अब खुद शरद पवार ने पूरी तरह नकार दिया है।
साल 1999 से 2023 तक का सफर और पार्टी में बगावत
इस राजनीतिक घटनाक्रम को समझने के लिए शरद पवार की पार्टी के इतिहास को जानना बेहद जरूरी है:
- वर्ष 1999 में स्थापना: शरद पवार ने साल 1999 में कांग्रेस पार्टी से वैचारिक मतभेदों के चलते अपना रास्ता अलग कर लिया था और उन्होंने एक नई राजनीतिक पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) की नींव रखी थी।
- वर्ष 2023 में ऐतिहासिक फूट: करीब दो दशकों से अधिक समय के बाद, साल 2023 में इस पार्टी में एक बहुत बड़ा सांगठनिक संकट आया। शरद पवार के अपने भतीजे अजित पवार ने बगावत का बिगुल फूंक दिया। इस बगावत के बाद असली एनसीपी का नाम और चुनाव चिह्न अजित पवार के गुट के पास चला गया।
- नया दल और गठबंधन: इस बड़ी टूट के बाद शरद पवार को अपने समर्थकों के साथ एनसीपी (शरदचंद्र पवार) नाम से नया दल बनाना पड़ा।
इसके बाद महाराष्ट्र का राजनीतिक परिदृश्य दो हिस्सों में बंट गया। जहां एक तरफ अजित पवार की अगुवाई वाली एनसीपी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन महायुति में शामिल हो गई, वहीं दूसरी तरफ शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी विपक्षी खेमे यानी महाविकास अघाड़ी के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरी। अब विलय की खबरों के खारिज होने के बाद यह साफ हो गया है कि शरद पवार अपनी नई पहचान के साथ ही आगे की राजनीतिक लड़ाई लड़ेंगे।
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