यूपी चुनाव 2027: क्या चिराग पासवान का 'ट्रिपल-P' फॉर्मूला बदल देगा उत्तर प्रदेश की राजनीति का समीकरण? उत्तर प्रदेश एक दिन पहले 15
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए एक नया 'ट्रिपल-P' फॉर्मूला पेश किया है, जो राज्य के मौजूदा सियासी गणित को प्रभावित कर सकता है।

यूपी के चुनावी मैदान में चिराग पासवान की नई रणनीति

बिहार में अपनी राजनीतिक जड़ें गहरी करने के बाद अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की निगाहें उत्तर प्रदेश की सत्ता पर टिकी हैं। वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी ने एक बेहद आक्रामक और रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के नेतृत्व में पार्टी अब एक नए सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले के साथ राज्य में अपनी पैठ बनाने की तैयारी कर रही है। इस कवायद को आगामी चुनावों में बड़ा उलटफेर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या है चिराग पासवान का 'ट्रिपल-P' प्लान?

हाल ही में न्यूज़18 इंडिया के ‘डायमंड स्टेट्स समिट बिहार’ कार्यक्रम के दौरान जमुई से सांसद अरुण भारती ने पार्टी की भविष्य की योजनाओं का खुलासा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिराग पासवान का विजन केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे उत्तर प्रदेश की जनता के लिए भी सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार हैं। इस रणनीति के केंद्र में पार्टी का नया नारा है: 'पंडित-पासी-पासवान, धरती गूंजे आसमान'

यह नारा लोक जनशक्ति पार्टी के पुराने और पारंपरिक नारे 'धरती गूंजे आसमान, रामविलास पासवान' का विस्तृत रूप है। इस बदलाव के जरिए पार्टी समाज के तीन प्रमुख वर्गों को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है:

  • पंडित (ब्राह्मण)
  • पासी (दलित समाज का एक प्रमुख वर्ग)
  • पासवान (दलित समुदाय)

राजनीतिक दलों के लिए क्यों है यह चुनौती?

सांसद अरुण भारती के इस दावे के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सरगर्मियां बढ़ गई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इन तीन समुदायों को एकजुट करने में सफल होती है, तो इसका सीधा असर भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के वोट बैंक पर पड़ सकता है। यह 'ट्रिपल-P' गठजोड़ इन प्रमुख दलों के परंपरागत समीकरणों को बिगाड़ने की क्षमता रखता है।

गठबंधन पर अभी संशय बरकरार

जब अरुण भारती से यह सवाल किया गया कि क्या एलजेपी (रामविलास) उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी या फिर अकेले चुनावी मैदान में उतरेगी, तो उन्होंने कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अभी गठबंधन के अंतिम स्वरूप को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस विषय पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही आखिरी फैसला लेगा। फिलहाल पार्टी का मुख्य ध्यान अपने संगठन को मजबूत करने और इस नए फॉर्मूले के जरिए जनता के बीच अपनी पैठ बनाने पर है।

चिराग पासवान जिस तरह से बिहार में दलितों और अन्य समुदायों के अधिकारों की वकालत करते रहे हैं, अब वही मॉडल उत्तर प्रदेश के सवर्ण और दलित समुदायों के लिए अपनाने की तैयारी की जा रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चिराग पासवान का यह नया प्रयोग उत्तर प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव लाने में सफल होगा या नहीं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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