शनि की वक्री चाल: 27 जुलाई से इन 3 राशियों की बढ़ने वाली हैं मुश्किलें, उज्जैन के ज्योतिषाचार्य ने दी चेतावनी धर्म 2 महीने पहले 77
सावन के महीने से ठीक पहले न्याय के देवता शनि अपनी गति बदलने जा रहे हैं, जिसका असर कई राशियों पर पड़ेगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य के अनुसार, वक्री चाल के दौरान 3 खास राशियों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।

शनि के बदलाव से बढ़ेंगी चुनौतियां

ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का मानना है कि कर्म फलदाता शनि जब भी अपनी चाल बदलते हैं, तो इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है। उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने बताया कि आगामी 27 जुलाई से शनि देव 138 दिनों के लिए वक्री अवस्था में प्रवेश करेंगे। यह समय कई लोगों के लिए नौकरी, व्यापार और पारिवारिक रिश्तों में तनाव और बाधाएं पैदा करने वाला हो सकता है।

इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

शनि की इस उल्टी चाल का सबसे अधिक प्रभाव निम्नलिखित राशियों पर पड़ने की संभावना है:

  • मेष राशि: इस राशि के जातकों के लिए मानसिक तनाव बढ़ सकता है। पुराने स्वास्थ्य संबंधी मुद्दे परेशान कर सकते हैं और वैवाहिक जीवन में भी गलतफहमियों की आशंका है।
  • सिंह राशि: कार्यों में देरी और रुकावटें देखने को मिल सकती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी के मामलों में असफलता का सामना करना पड़ सकता है, साथ ही संतान पक्ष से जुड़ी चिंताएं बढ़ सकती हैं।
  • कुंभ राशि: परिवार में पुराने विवाद फिर से सिर उठा सकते हैं। सामाजिक मान-सम्मान पर आंच न आए, इसके लिए इस राशि के लोगों को सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी गई है।

अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय

ज्योतिषाचार्य ने स्पष्ट किया है कि घबराने के बजाय धैर्य और सावधानी से इस समय को पार किया जा सकता है। शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए ये उपाय अपनाए जा सकते हैं:

  • मंगलवार के दिन विशेष रूप से हनुमान जी की उपासना करें और हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें।
  • शनि देव के मंदिर जाकर विधिवत तेल से उनका अभिषेक करें।
  • गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना इस दौरान काफी फलदायी माना गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वक्री चाल के दौरान किसी भी तरह के बड़े फैसले जल्दबाजी में लेने से बचना चाहिए और अपने स्वभाव में शांति बनाए रखनी चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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