भारत को मिला सस्‍ते तेल का नया ऑफर, हर बैरल पर होगी 4 डॉलर की बचत व्यापार 3 महीने पहले 126
अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने के बाद भारत को सस्‍ता कच्चा तेल खरीदने का मौका मिला है। इस डील के जरिए भारतीय रिफाइनरियों को प्रति बैरल 4 डॉलर तक की राहत मिल सकती है।

ईरान से सस्‍ते तेल की नई पेशकश

भारतीय तेल कंपनियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से रूस से रियायती दरों पर तेल खरीद रहा भारत अब एक बार फिर अपने पुराने सहयोगी ईरान की तरफ रुख कर सकता है। अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों में फिलहाल 60 दिनों की अस्थायी ढील दी है, जिसका सीधा फायदा भारत को मिलने की संभावना है। इस छूट के मिलते ही कई अंतरराष्ट्रीय व्यापारियों और बिचौलियों ने भारत को ईरान से सस्‍ता कच्चा तेल खरीदने का प्रस्ताव दिया है। इस सौदे के माध्यम से भारत को सामान्य क्रूड ऑयल की कीमतों के मुकाबले हर बैरल पर 3 से 4 डॉलर तक की सीधी बचत हो सकती है।

बिचौलियों और तेल कंपनियों की सक्रियता

अमेरिकी प्रतिबंधों में मिली इस सीमित अवधि की ढील का लाभ उठाने के लिए तेहरान काफी उत्सुक है। ईरान अपनी तेल बिक्री को तेजी से बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। बाजार सूत्रों की मानें तो भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क करने वाले बिचौलिए मुख्य रूप से सिंगापुर और दुबई की छोटी और मध्यम श्रेणी की ट्रेडिंग कंपनियों से जुड़े हुए हैं। ये मध्यस्थ दावा कर रहे हैं कि उन्हें सीधे ईरान के सरकारी तेल उत्पादक संस्थान यानी NIOC से तेल आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। भारतीय रिफाइनरी जगत के एक सूत्र ने स्पष्ट किया है कि हालांकि कई निजी व्यापारी उनके संपर्क में हैं, लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता सीधे नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी के साथ मिलकर काम करना है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

तेल की कीमतों में कितनी होगी राहत

ईरानी तेल के दाम वैश्विक मानकों और क्षेत्रीय ग्रेड्स के मुकाबले काफी आकर्षक हैं। NIOC की ओर से भारतीय खरीदारों को संकेत दिए गए हैं कि ईरानी कच्चा तेल अन्य क्षेत्रीय विकल्पों के मुकाबले करीब 3 से 4 डॉलर प्रति बैरल सस्ता उपलब्ध कराया जा सकता है। यह अंतर भारतीय रिफाइनरियों के मार्जिन और देश के तेल आयात बिल को कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। हाल ही में ईरानी पेट्रोलियम मंत्री मोहसिन पकनेजाद ने भी नई दिल्ली का दौरा किया था, जिसके दौरान कच्चे तेल और एलपीजी की संभावित आपूर्ति को लेकर गहन चर्चा की गई।

रिफाइनरियों की सीमाएं और भविष्य की चुनौतियां

इस आकर्षक ऑफर के बावजूद भारतीय रिफाइनरियों के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि ज्यादातर भारतीय रिफाइनरियों ने अगस्त महीने तक की अपनी तेल आपूर्ति पहले ही तय कर ली है। इसके अलावा, मध्य पूर्व के अन्य आपूर्तिकर्ता भी अपने सालाना कॉन्‍ट्रैक्‍ट को पूरा करने का दबाव बना रहे हैं। ऐसे में निकट भविष्य में ईरानी तेल की बड़ी मात्रा को शामिल करने की गुंजाइश सीमित दिखती है। इसके अलावा, ईरान के साथ व्यापार में भुगतान और बैंकिंग चैनल्स की जटिलता भी एक बड़ी बाधा है, जिसे सुलझाने में समय लग सकता है।

पुराना इतिहास और तेल व्यापार का समीकरण

भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार का इतिहास काफी पुराना रहा है। एक समय था जब साल 2010 के आसपास ईरान भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता हुआ करता था। हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के कारण भारत ने अपनी खरीद में भारी कटौती की और मई 2019 में इसे पूरी तरह से बंद कर दिया था। उल्लेखनीय है कि भारत पहले ही व्यापारियों के माध्यम से ईरानी एलपीजी का आयात कर रहा है। इससे पहले अप्रैल में, वाशिंगटन की 30 दिनों की छूट के बाद भारत को ईरानी तेल के दो कार्गो मिले थे, जिनका भुगतान चीनी युआन में किया गया था। इस बार के 60 दिनों के प्रतिबंध हटाए जाने के बाद देखना होगा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस अवसर का कितना प्रभावी उपयोग कर पाता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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