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3 घंटे पहले
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रूस से तेल आयात में नया रिकॉर्ड
भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के मामले में एक नया इतिहास रच दिया है। जून महीने में रूसी तेल का आयात 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन के आल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा भारत द्वारा खरीदे गए कुल तेल का 53.5 फीसदी हिस्सा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्पष्ट है कि अमेरिका के कड़े रुख और डोनाल्ड ट्रंप के लगातार दबाव के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा नीतियों पर अडिग है।
क्यों बढ़ रही है रूसी तेल की मांग
कमोडिटी मार्केट एनालिस्ट केप्लर की रिपोर्ट के अनुसार, रूसी तेल पर मिलने वाला भारी डिस्काउंट और भारतीय रिफाइनरियों की बढ़ती मांग इसका मुख्य कारण है। ईरान संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिसके बाद भारत ने मार्च के महीने से अपनी रणनीति में बदलाव किया था। उस दौरान वैश्विक स्तर पर शिपमेंट का किराया बढ़ने के बावजूद रूस से तेल मंगाना भारत के लिए अधिक किफायती साबित हुआ।
रूस से तेल आयात का सफर
भारत ने पिछले कुछ महीनों में रूसी तेल आयात के आंकड़ों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखा है:
- नवंबर 2025: 18.4 लाख बैरल प्रतिदिन
- दिसंबर 2025: 12.4 लाख बैरल प्रतिदिन
- जनवरी 2026: 10.9 लाख बैरल प्रतिदिन
- फरवरी 2026: 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन
- मार्च 2026: 19.9 लाख बैरल प्रतिदिन
- अप्रैल 2026: 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन
- मई 2026: 19.1 लाख बैरल प्रतिदिन
- जून 2026: 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन
आगे की राह
केप्लर के रिफाइनिंग मैनेजर सुमित रितोलिया का मानना है कि भविष्य में भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए रूसी तेल ईंधन का सबसे प्रमुख जरिया बना रहेगा। भले ही अमेरिका आगे प्रतिबंधों को लेकर कोई नई नीति अपनाए, लेकिन भारतीय बाजार में रूसी तेल की भारी मांग बने रहने की पूरी संभावना है। भारत ने न केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस का रुख किया, बल्कि वेनेजुएला और उत्तरी अमेरिका जैसे अन्य विकल्पों के साथ भी संतुलन बनाकर रखा है।
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