भारत को मिला प्राकृतिक गैस का नया खजाना, 20 हजार परिवारों की बुझ सकती है जरूरत व्यापार 2 घंटे पहले 4
भारत ने कृष्णा-गोदावरी बेसिन में गैस का एक नया और महत्वपूर्ण भंडार खोजा है, जिससे देश की आयात निर्भरता को कम करने में बड़ी मदद मिलेगी। सरकारी तेल कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड ने बताया कि इस खोज से प्रतिदिन 2 लाख SCMD गैस का उत्पादन किया जा सकता है।

कृष्णा-गोदावरी बेसिन में मिली बड़ी सफलता

भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। देश को गैस का एक नया भंडार मिल गया है, जो न केवल ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि विदेशी ईंधन पर हमारी निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा। यह खोज ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) द्वारा की गई है, जो एक प्रमुख सरकारी तेल कंपनी है। कंपनी ने जानकारी दी है कि कृष्णा-गोदावरी बेसिन के उथले जल क्षेत्र वाले एक ब्लॉक में प्राकृतिक गैस के नए भंडार का पता चला है।

खोज का विवरण और स्थान

ऑयल इंडिया लिमिटेड ने बताया कि यह महत्वपूर्ण उपलब्धि 'डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड' (DSF) बोली प्रक्रिया के माध्यम से हासिल किए गए ब्लॉक में मिली है। यह क्षेत्र भारत के पूर्वी तट के पास कृष्णा-गोदावरी बेसिन के मत्स्यपुरी फॉर्मेशन में स्थित है। कंपनी के अनुसार, यह खोज KG-DSF/GSKW/2018 नामक उथले पानी के ऑफशोर ब्लॉक के अंतर्गत 'गोदावरी-1' नामक कुएं में हुई है। यहाँ 2,024 से 2,027 मीटर की गहराई में हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी का पता चला था। इस क्षेत्र में परीक्षण की प्रक्रिया 16 अक्टूबर, 2026 से शुरू की गई थी, जिसके बाद अब आधिकारिक रूप से गैस मिलने की पुष्टि कर दी गई है।

कितनी गैस मिलेगी और क्या है उत्पादन क्षमता

परीक्षण के दौरान इस कुएं से गैस का प्रवाह बेहद उत्साहजनक रहा है। कुएं से लगातार गैस का प्रवाह लगभग 100,000 SCMD (स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन) की दर से दर्ज किया गया है, जबकि परीक्षण के दौरान अधिकतम प्रवाह 200,000 SCMD तक पहुंच गया है। इसके अलावा, कंपनी ने बताया है कि वहां से प्रतिदिन लगभग 170 बैरल कंडेनसेट का उत्पादन भी होने की उम्मीद है। फिलहाल इस क्षेत्र में संसाधनों के विस्तृत आकलन के लिए तैयारियां की जा रही हैं।

घरेलू उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य

भारत सरकार का एक प्रमुख लक्ष्य वर्ष 2030 तक घरेलू प्राकृतिक गैस के उत्पादन को कुल खपत के 15 फीसदी तक पहुंचाना है। वर्तमान में देश अपनी कुल गैस खपत का मात्र 6 फीसदी ही उत्पादन कर पा रहा है, जिसके कारण हम बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर हैं। इस निर्भरता को कम करने के लिए सरकार कृष्णा-गोदावरी बेसिन समेत गहरे पानी वाले क्षेत्रों में खोज और उत्पादन गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दे रही है।

आम जनजीवन पर क्या होगा प्रभाव

इस नई खोज से होने वाला प्रतिदिन 2 लाख SCMD का गैस उत्पादन आम जनता के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी गैस से लगभग 20 हजार परिवारों की महीनेभर की रसोई संबंधी जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। यदि इस गैस का उपयोग परिवहन क्षेत्र में किया जाए, तो प्रतिदिन उत्पादित होने वाली गैस से सीएनजी कारों के लिए लगभग 35 लाख किलोमीटर तक चलने के लिए ईंधन तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा, यदि इस गैस का उपयोग बिजली उत्पादन में किया जाता है, तो एक दिन के उत्पादन से करीब 8 से 10 लाख यूनिट बिजली पैदा की जा सकती है, जो ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ी राहत होगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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