GST काउंसिल का बड़ा फैसला: अमेजन-फ्लिपकार्ट की डिलीवरी पर अब 5 फीसदी GST, इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ खत्म व्यापार 2 घंटे पहले 2
जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में ई-कॉमर्स कंपनियों की डिलीवरी सेवाओं को लेकर नए नियम जारी किए गए हैं, जिसके तहत अब डिलीवरी पर 5 फीसदी जीएसटी लगेगा और आईटीसी का फायदा बंद कर दिया गया है।

जीएसटी परिषद का महत्वपूर्ण निर्णय

ई-कॉमर्स के माध्यम से होने वाली सामान की डिलीवरी को लेकर जीएसटी परिषद ने अपनी 57वीं बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 8 अक्टूबर को आयोजित इस बैठक में परिषद ने ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा प्रदान की जाने वाली डिलीवरी सेवाओं के लिए जीएसटी की दर तय कर दी है। अब से ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के जरिए सामान की डिलीवरी किसी भी माध्यम से की जाए, उस पर 5 फीसदी जीएसटी अनिवार्य रूप से वसूला जाएगा। लंबे समय से डिलीवरी पर लगने वाले टैक्स को लेकर कंपनियों के बीच असमंजस की स्थिति थी, जिसे इस फैसले के बाद पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया गया है।

डिलीवरी मोड और जीएसटी की स्पष्टता

पूर्व में गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसियों यानी GTA के जरिए की जाने वाली डिलीवरी पर जीएसटी से छूट का प्रावधान था। हालांकि, अब परिषद ने स्थिति साफ करते हुए यह निर्धारित किया है कि डिलीवरी के लिए चाहे किसी भी मोड का इस्तेमाल किया जाए, 5 फीसदी जीएसटी लागू रहेगा। यह नया नियम उन डिलीवरी सेवाओं पर प्रभावी होगा जो कुरियर और पोस्टल सेवाओं से भिन्न हैं। इसके साथ ही, यह स्पष्ट किया गया है कि ये डिलीवरी सेवाएं केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 9(5) के दायरे में आती हैं और इन्हें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से संचालित किया जाता है।

डिलीवरी पार्टनर के लिए राहत

काउंसिल के निर्देशों के अनुसार, ई-कॉमर्स डिलीवरी में सेवा प्रदान करने वाला व्यक्ति केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 22(1) के तहत जीएसटी पंजीकरण कराने के लिए बाध्य नहीं होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि सामान को उपभोक्ता तक पहुंचाने वाला डिलीवरी पार्टनर इस विशिष्ट सेवा के लिए जीएसटी भुगतान के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी नहीं होगा। यह प्रावधान डिलीवरी कार्य से जुड़े लोगों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा समाप्त

जीएसटी परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि ई-कॉमर्स डिलीवरी पर 5 फीसदी जीएसटी की दर तय किए जाने के बाद, अब कंपनियों को इस पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ नहीं मिलेगा। काउंसिल ने बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के ही इस टैक्स दर का प्रस्ताव रखा है। परिषद के इस कदम से उन मामलों में मौजूदा जीएसटी छूट समाप्त हो जाएगी, जिनमें गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसियां बिना रजिस्ट्रेशन वाले लोगों तक ई-कॉमर्स के जरिए ऑर्डर किया गया सामान पहुंचाती हैं। अब ऐसी सभी सेवाओं पर आईटीसी क्लेम की सुविधा पूरी तरह से बंद कर दी गई है।

टैक्स के बोझ और नियमों में बदलाव

इस बदलाव के बाद ई-कॉमर्स सेक्टर के विशाल डिलीवरी इकोसिस्टम में जीएसटी नियमों को लेकर स्पष्टता जरूर आएगी, लेकिन कुछ लेन-देन पर टैक्स का वित्तीय बोझ बढ़ सकता है। सरकारी सूत्रों ने पुष्टि की है कि ट्रांसपोर्ट के सभी उपलब्ध तरीकों से सामान भेजने पर अब 5 फीसदी जीएसटी लागू होगा। पहले जो सामान गुड्स ट्रांसपोर्ट एजेंसियों के माध्यम से भेजा जाता था और जिसे टैक्स से छूट प्राप्त थी, अब वह भी इस नए दायरे में आ गया है। इस प्रकार, ई-कॉमर्स के जरिए सप्लाई किए गए सामान की डिलीवरी सर्विस पर टैक्स ढांचे का सरलीकरण किया गया है, जिसका असर कंपनियों और ग्राहकों दोनों पर पड़ेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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