पश्चिम बंगाल
एक घंटा पहले
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विचारों
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तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों को HDFC बैंक ने फ्रीज कर दिया है, जिसमें 440 करोड़ रुपये जमा होने की बात सामने आई है। इस कदम से पश्चिम बंगाल की राजनीति में खलबली मच गई है और पार्टी के भीतर खींचतान तेज हो गई है।
बैंक खातों पर लगी रोक
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सामने एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। HDFC बैंक ने पार्टी के 3 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा होने का दावा किया जा रहा है। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर मचे आंतरिक कलह के बीच सामने आया है।
कैसे हुई खातों पर कार्रवाई?
इस पूरी कार्रवाई की पृष्ठभूमि कुछ इस प्रकार है:
- पूर्व मंत्री Arup Biswas ने खुद को पार्टी का कोषाध्यक्ष बताते हुए HDFC बैंक की सेंट्रल प्लाजा शाखा को पत्र लिखा और लेनदेन रोकने की मांग की।
- बागी विधायकों ने विधाननगर पुलिस की साइबर सेल को शिकायत दी, जिसके बाद पुलिस ने बैंक को सूचित किया।
- बैंक ने इन शिकायतों के आधार पर तीनों खातों के संचालन पर रोक लगा दी और पुलिस को इसकी जानकारी दे दी।
पार्टी का पक्ष और विवाद
तृणमूल कांग्रेस का आधिकारिक रुख यह है कि 5 जून को Arup Biswas को कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह पूर्व सांसद Subhashish Chakraborty को यह जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी का आरोप है कि पद से हटने के बावजूद Arup Biswas ने 12 जून को बैंक को पत्र लिखा था।
विपक्ष और नेताओं की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है:
- विपक्ष के नेता Ritabrata Bandyopadhyay ने Arup Biswas का समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन खातों में कटमनी, चोरी या गबन का पैसा हो सकता है और इसकी गहन जांच होनी चाहिए।
- बागी खेमे के नेता Sandipan Saha ने बैंक के फैसले का स्वागत करते हुए धन के स्रोत की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
- वहीं, तृणमूल विधायक Kunal Ghosh ने पलटवार करते हुए कहा कि जो विधायक आज इन खातों को अवैध कह रहे हैं, उन्हें बताना चाहिए कि क्या उन्होंने चुनाव के दौरान इन्हीं खातों से पैसा लिया था। उन्होंने बागी नेताओं पर पार्टी नेतृत्व को बिना बताए खातों को फ्रीज करवाने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है।
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