पाकिस्तान
एक घंटा पहले
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पाकिस्तान में ऊर्जा संकट और ब्लैकआउट का मुख्य कारण
पड़ोसी देश पाकिस्तान में इन दिनों बिजली कटौती, लंबे ब्लैकआउट और घरेलू गैस की भयंकर किल्लत के कारण हाहाकार मचा हुआ है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी उतार-चढ़ाव का सबसे गहरा असर पाकिस्तान की पूरी अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर देखने को मिल रहा है। इस पूरे ऊर्जा संकट के केंद्र में LNG यानी लिक्विफाइड नैचुरल गैस है। गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण पाकिस्तान के बिजली संयंत्र ठप पड़ चुके हैं और आम लोगों को रसोई गैस तक के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
आखिर क्या होती है LNG और कैसे तैयार की जाती है?
LNG का पूरा नाम लिक्विफाइड नैचुरल गैस (Liquefied Natural Gas) है, जो कि प्राकृतिक गैस का ही एक तरल रूप है। इसमें मुख्य रूप से मीथेन गैस शामिल होती है। वैज्ञानिक और तकनीकी प्रक्रिया के तहत जब जमीन या समुद्र के नीचे से निकाली गई प्राकृतिक गैस को माइनस 162 डिग्री सेल्सियस (-162°C) तक ठंडा किया जाता है, तो यह गैस अवस्था से बदलकर तरल (तरल पदार्थ) रूप ले लेती है।
गैस को तरल में बदलने की खास वजह
प्राकृतिक गैस को माइनस 162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके तरल बनाने का सबसे बड़ा फायदा इसके आयतन (वॉल्यूम) में होता है। तरल बनते ही गैस का आयतन लगभग 600 गुना कम हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि जिस प्राकृतिक गैस को भरने के लिए किसी विशाल मैदान जितनी जगह की आवश्यकता होती है, उसे तरल रूप में बदलकर एक छोटे टैंकर में आसानी से समेटा जा सकता है।
- परिवहन में आसानी: आयतन 600 गुना घटने के कारण इस ईंधन को बड़े समुद्री जहाजों (विशेष LNG टैंकर्स) के जरिए एक देश से दूसरे देश तक भेजना काफी आसान और किफ़ायती हो जाता है।
- री-गैसीफिकेशन प्रक्रिया: जब यह ईंधन आयातक देश के बंदरगाह पर पहुंचता है, तो वहां बने विशेष री-गैसीफिकेशन प्लांट में इसे दोबारा गैस रूप में बदला जाता है। इसके बाद इसे पाइपलाइन के जरिए घरों, कारखानों और बिजली घरों तक पहुंचाया जाता है।
पाकिस्तान में क्यों खड़ा हुआ इतना बड़ा एलएनजी संकट?
पाकिस्तान अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों और बिजली उत्पादन के लिए लंबे समय से LNG के आयात पर निर्भर रहा है। हालांकि, हालिया अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण उसकी पूरी आपूर्ति श्रृंखला ध्वस्त हो गई है। इसके पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण जिम्मेदार हैं:
1. कतर पर अत्यधिक निर्भरता
पाकिस्तान अपनी आवश्यकता की 90% से अधिक LNG की खरीदारी दीर्घकालिक अनुबंध (लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट) के तहत कतर से करता रहा है। मध्य पूर्व में बढ़े तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों के प्रभावित होने के कारण कतर से आने वाले जहाजों और कार्गो की आपूर्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
2. स्पॉट मार्केट में ऊंची कीमतें
कतर से दीर्घकालिक आपूर्ति बाधित होने के बाद पाकिस्तान को तुरंत गैस हासिल करने के लिए खुले अंतरराष्ट्रीय बाजार (स्पॉट मार्केट) का रुख करना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG के दाम अत्यधिक ऊंचाई पर पहुंच चुके हैं।
3. खाली खजाना और रद्द होती डिलीवरी
पाकिस्तान पहले से ही भीषण विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा है। कंगाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान के पास महंगे दामों पर LNG खरीदने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है। जब पाकिस्तान ने ऊंची बोलियां लगाने में असमर्थता जताई या वैश्विक कंपनियों ने अधिक कीमत देने वाले यूरोपीय और एशियाई देशों को प्राथमिकता दी, तो पाकिस्तान के लिए निर्धारित डिलीवरी रद्द कर दी गईं।
4. बिजली संकट के साथ जहरीले स्मॉग का हमला
गैस आपूर्ति न होने से पाकिस्तान के बड़े पावर प्लांट बंद हो गए हैं। बिजली उत्पादन बनाए रखने के लिए वहां की सरकार मजबूरी में फर्नेस ऑयल और घटिया किस्म के कोयले का इस्तेमाल कर रही है। ईंधन के इस खतरनाक विकल्प की वजह से लाहौर और पंजाब प्रांत में वायु प्रदूषण का स्तर जानलेवा हो गया है और पूरा इलाका गहरे स्मॉग की चपेट में आ गया है।
दुनिया में LNG के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता देश कौन से हैं?
वैश्विक स्तर पर LNG के उत्पादन और निर्यात पर चुनिंदा देशों का ही वर्चस्व है। दुनिया के शीर्ष आपूर्तिकर्ताओं में ये देश शामिल हैं:
- अमेरिका: शेल गैस क्रांति के बल पर अमेरिका वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक देश बन चुका है। अमेरिका ने यूरोप और एशियाई बाजारों में रिकॉर्ड मात्रा में गैस की सप्लाई की है।
- कतर: कतर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है। अपने विशालकाय 'नॉर्थ फील्ड' प्रोजेक्ट के कारण कतर सबसे सस्ती LNG उत्पादित करने वाला देश है। यह भारत और पाकिस्तान समेत पूरे एशिया का मुख्य सप्लायर है।
- ऑस्ट्रेलिया: यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक प्रमुख खिलाड़ी है, जो मुख्य रूप से जापान, चीन और दक्षिण कोरिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करता है।
- रूस: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद रूस अपने प्रसिद्ध 'यामल' प्रोजेक्ट के माध्यम से वैश्विक बाजार में एक बड़ी भूमिका निभा रहा है।
- मलेशिया और नाइजीरिया: यह दोनों देश भी दुनिया के शीर्ष 5 LNG सप्लायर्स की सूची में मजबूती से गिने जाते हैं।
LNG का उपयोग कहां-कहां किया जाता है?
आयात करने के बाद जब LNG को री-गैसीफिकेशन प्लांट में फिर से प्राकृतिक गैस में बदला जाता है, तब इसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है:
- बिजली उत्पादन में: गैस आधारित पावर प्लांट में प्राकृतिक गैस को जलाकर टरबाइन चलाई जाती है, जिससे बड़े पैमाने पर बिजली पैदा होती है।
- उर्वरक निर्माण में: प्राकृतिक गैस खाद उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसका उपयोग अमोनिया और यूरिया बनाने में होता है।
- औद्योगिक कारखानों में: कांच, सिरेमिक, धातु, रसायन और अन्य भारी उद्योगों में भट्ठियों को गर्मी देने और उत्पादन प्रक्रियाओं के लिए इसका उपयोग होता है।
- घरेलू और व्यावसायिक उपयोग: पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए इसे PNG के रूप में घरों के रसोईघर, होटलों और व्यावसायिक संस्थानों तक पहुंचाया जाता है। इसके अलावा वाहनों में यह CNG के रूप में इस्तेमाल होती है।
- परिवहन क्षेत्र में: विशेष इंजन और ईंधन भंडारण प्रणाली वाले भारी वाहनों, ट्रकों और समुद्री जहाजों में भी इसे सीधे ईंधन के रूप में प्रयोग किया जा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भारत के लिए सबक
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में LNG की भूमिका बेहद निर्णायक हो चुकी है। प्राकृतिक गैस को माइनस 162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करके उसका आयतन 600 गुना घटाना और फिर जहाजों से परिवहन करना आधुनिक व्यापार का एक मुख्य स्तंभ है। भारत जैसे तेजी से बढ़ते देश के लिए भी LNG बिजली, उर्वरक निर्माण और शहरी गैस नेटवर्क की जरूरतों को पूरा करने का अहम जरिया है। पाकिस्तान का वर्तमान संकट यह स्पष्ट करता है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए केवल आयात पर निर्भर रहना और दीर्घकालिक वित्तीय योजना न होना किसी भी देश की व्यवस्था को ठप कर सकता है।
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