केंद्र और जम्मू-कश्मीर में अविश्वास के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस जिम्मेदार, महबूबा मुफ्ती का फारूक अब्दुल्ला पर निशाना राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 7
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के गिरगिटी रवैये के कारण दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बीच अविश्वास की खाई गहरी हुई है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से 2014 में भाजपा के साथ किए गए गठबंधन पर न हिचकने की अपील की।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के राजनीतिक रुख पर पीडीपी का करारा हमला

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अविश्वास के माहौल को लेकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर तीखा प्रहार किया है। कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में बोलते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर के बीच दशकों से बनी संदेह की स्थिति के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस का बदलता रुख जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी ने कश्मीर मुद्दे पर बार-बार अपना स्टैंड बदला है, जिससे आम लोगों के बीच भ्रम पैदा हुआ है।

79 साल पुराने विलय और शेख अब्दुल्ला के फैसलों पर उठाए सवाल

महबूबा मुफ्ती ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ऐतिहासिक संदर्भों का प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 79 साल पहले जब देश आजाद हुआ था, उसी समय जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ था। इस ऐतिहासिक विलय पत्र पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने हस्ताक्षर किए थे। जम्मू-कश्मीर के एक मुस्लिम बहुल राज्य होने के बावजूद, शेख अब्दुल्ला ने भारत के साथ जुड़ने का फैसला लिया था।

हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के अनुसार, इस विलय के कुछ ही वर्षों के भीतर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपनी राय बदल ली। उन्होंने कहा कि विलय के बाद पार्टी ने अचानक जनमत संग्रह की मांग उठानी शुरू कर दी, जिससे अनिश्चितता का दौर शुरू हुआ।

22 वर्षों की राजनीति और 1975 का ऐतिहासिक समझौता

नेशनल कॉन्फ्रेंस की नीतियों की आलोचना करते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जनता के मन में अविश्वास का बीज इसी पार्टी ने बोया है। उन्होंने कहा:

  • नेशनल कॉन्फ्रेंस ने लगभग 22 साल तक पाकिस्तान में जनमत संग्रह कराने की मांग उठाई।
  • इसके बाद अचानक 1975 में सत्ता हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी स्वीकार कर ली।

इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने इंदिरा-शेख समझौते का जिक्र किया और कहा कि 1975 के समझौते के तहत जब नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक मुख्यमंत्री बने, तब उनकी पार्टी का एक भी विधायक विधानसभा में नहीं था। महबूबा मुफ्ती ने दावा किया कि शेख अब्दुल्ला ने सत्ता की चाहत में मुख्यमंत्री पद स्वीकार किया और जनता से जनमत संग्रह के वादे को भूल जाने के लिए कहा।

उन्होंने आगे कहा कि जवाहरलाल नेहरू और डॉ. बी.आर. आंबेडकर जैसे भारत के शीर्ष नेताओं ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा और संविधान दिया था। लेकिन नेशनल कॉन्फ्रेंस के ढुलमुल रवैये के कारण दिल्ली के नेताओं के मन में न सिर्फ स्थानीय नेताओं बल्कि हर कश्मीरी नागरिक के प्रति अविश्वास की भावना पैदा हो गई। महबूबा ने साफ किया कि जब तक नेशनल कॉन्फ्रेंस सत्ता में रहेगी, क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित होना कठिन है।

2014 के भाजपा गठबंधन पर कार्यकर्ताओं को दिया परामर्श

पार्टी कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाते हुए पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी के साथ सरकार बनाने के फैसले को लेकर बिल्कुल भी शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जब भी नेशनल कॉन्फ्रेंस के लोग भाजपा के साथ गठबंधन का मुद्दा उठाएं, तो उन्हें याद दिलाया जाए कि उनके अपने नेताओं ने किस तरह कश्मीर मुद्दे पर लगातार रुख बदलकर आम जनता को मुसीबत में डाला था।

फारूक अब्दुल्ला के बयान और कश्मीर मुद्दे पर बातचीत का संदेश

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला का नाम लिए बिना महबूबा मुफ्ती ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके फारूक अब्दुल्ला यह दावा करके कश्मीरियों को उकसाने का काम कर रहे हैं कि पाकिस्तान कश्मीर की रक्षा कर रहा है। महबूबा मुफ्ती ने इस बयान को दिल्ली के लिए एक संकेत करार देते हुए कहा कि यह यह दर्शाने की कोशिश है कि कश्मीरी पाकिस्तान के साथ हैं।

अपने भाषण के अंत में केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए महबूबा मुफ्ती ने जोर दिया कि कश्मीर समस्या का समाधान बलप्रयोग या सख्ती के उपायों से नहीं निकाला जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे का स्थायी समाधान केवल बातचीत के जरिए ही संभव है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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