कारगिल विजय दिवस: 'करके नमक हलाल लड़ते हुए गिरे...' सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने कविता पढ़ शहीदों को दी श्रद्धांजलि भारत एक दिन पहले 5
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास पहुंचे भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी और अपनी यूनिट के सैनिक की लिखी एक भावुक कविता सुनाई।

भारत आज यानी 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ मना रहा है। पूरा देश वर्ष 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर जवानों के अदम्य साहस और शौर्य को नमन कर रहा है। इस ऐतिहासिक और गौरवशाली दिन के अवसर पर लद्दाख के द्रास में एक विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भारतीय थल सेना के प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने शिरकत की और देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सेना प्रमुख ने इस दौरान देश के जवानों के हौसले की जमकर तारीफ की और कहा कि पूरी दुनिया में भारतीय सैनिकों का कोई मुकाबला नहीं कर सकता। शहीदों की याद में जनरल धीरज सेठ ने एक बेहद भावुक कर देने वाली कविता भी पढ़ी।

द्रास में गूंजी वीर जवानों के शौर्य की गाथा

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने कहा कि वह देश के बहादुर और वीर शहीदों को अपनी ओर से अत्यंत विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति भी अपना गहरा सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि कारगिल विजय दिवस के इस गरिमामयी कार्यक्रम में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति भारतीय सेना के लिए गर्व की बात है। सेना प्रमुख के अनुसार, रक्षा मंत्री की द्रास में मौजूदगी सेना के तमाम जवानों और अधिकारियों के लिए आने वाले समय में एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी और इससे सैनिकों का मनोबल और मजबूत होगा।

अपनी ही यूनिट के सैनिक की लिखी कविता सुनाकर किया याद

कारगिल के रणबांकुरों को याद करते हुए जनरल धीरज सेठ भावुक हो गए। उन्होंने वहां मौजूद लोगों के सामने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा कि आज जब वह इन वीर जवानों को याद कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी ही यूनिट के एक सैनिक द्वारा लिखी गई एक विशेष रचना की याद आ रही है। उन्होंने इस मार्मिक रचना को सबके सामने प्रस्तुत किया:

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मरना सभी को है तुम भले मरे,

करके नमक हलाल लड़ते हुए गिरे,

भूलोगे आप नहीं जो छिप गई शक्ल,

सफे-ज़मीं पर नाम हुआ तुम्हारा अटल।

विश्व स्तर पर भारतीय सैनिकों की तुलना असंभव

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने कहा कि यह कविता हमारे देश के वीर बलिदानियों पर पूरी तरह से सटीक बैठती है। उन्होंने गर्व से कहा कि भारतीय सेना का हर एक योद्धा पूरी दुनिया में सबसे अनूठा और सर्वश्रेष्ठ है। उनका कहना था कि भारतीय सैनिकों का शौर्य और पराक्रम विश्व की किसी भी अन्य सेना के सैनिकों से इतना अधिक श्रेष्ठ और बढ़-चढ़कर है कि किसी के साथ भी उनका मुकाबला या तुलना नहीं की जा सकती है।

देश के तिरंगे को और ऊंचा लहराने का संकल्प

इस खास मौके पर जनरल धीरज सेठ ने पूरे देशवासियों को अपनी और थल सेना की तरफ से एक बड़ा भरोसा दिलाया। उन्होंने दृढ़ संकल्प व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय थल सेना देश की सुरक्षा के साथ-साथ राष्ट्र की प्रगति और विकास में पूरी तरह से देश के साथ खड़ी है। उन्होंने यह विश्वास भी दिलाया कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना देश की संप्रभुता की रक्षा करते हुए देश के परचम को दुनिया में और भी ऊंचा लहराएगी। गौरतलब है कि कारगिल विजय दिवस के इस पावन पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश के वीर सपूतों और उनके अद्वितीय शौर्य को नमन करते हुए अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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