करौली का कैलादेवी मंदिर: चंबल के खूंखार डकैत भी झुकते थे मां के दरबार में, चढ़ाते थे घंटे धर्म एक घंटा पहले 6
राजस्थान के करौली स्थित कैलादेवी मंदिर का इतिहास केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि चंबल के दुर्दांत डकैतों के साथ जुड़े किस्सों के लिए भी जाना जाता है।

डकैतों की आस्था का केंद्र

राजस्थान के करौली में स्थित कैलादेवी मंदिर की ख्याति केवल उत्तर भारत के एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में ही नहीं है, बल्कि यह स्थान चंबल के कुख्यात डकैतों के गुप्त इतिहास के लिए भी चर्चा में रहता है। स्थानीय किंवदंतियों और मंदिर के सेवकों की मानें तो जिन डकैतों का नाम सुनकर कभी चंबल के बीहड़ों में लोग थर-थर कांपते थे, वे भी मां के सामने अपना सिर झुकाने आते थे।

रूपा डकैत का मंदिर आना

इन डकैतों की आस्था से जुड़ी कहानियां आज भी लोगों के बीच सुनी और सुनाई जाती हैं। कहा जाता है कि ये डकैत अपनी पहचान छिपाकर मंदिर में दाखिल होते थे ताकि कोई उन्हें पहचान न सके। वहां पहुंचकर वे विधिवत पूजा-अर्चना करते और अपनी मन्नतें पूरी करने की कामना के साथ मंदिर में घंटा अर्पित करते थे। राज्याचार्य पंडित प्रकाश चंद जती के अनुसार, करीब 40 साल पहले रूपा डकैत ने स्वयं मंदिर में आकर मां के दर्शन किए थे। ये किस्से न केवल मंदिर की पुरानी जनश्रुतियों का हिस्सा हैं, बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि अपराध की दुनिया में रहने वाले लोग भी किस तरह गहरे आध्यात्मिक विश्वास को अपने भीतर संजोए हुए थे। आज भी सालभर लाखों श्रद्धालु इस पवित्र मंदिर में मां का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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