उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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लापरवाही पर सख्त कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क की सतह के खिसकने यानी स्लिपेज की समस्या को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने पूरी गंभीरता के साथ लिया है। कार्य में लापरवाही बरतने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने के आरोपों के चलते प्राधिकरण ने बड़ा कदम उठाते हुए तीन प्रमुख अधिकारियों को इस परियोजना से तत्काल प्रभाव से बाहर कर दिया है। इन अधिकारियों पर न केवल कार्रवाई की गई है, बल्कि उन्हें अगले 2 वर्षों की अवधि के लिए NHAI समेत तीन प्रमुख सरकारी संस्थानों की किसी भी परियोजना में काम करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्राधिकरण ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता में कोई खोट नहीं है और सुधार का सारा खर्च संबंधित कंपनी खुद उठा रही है।
कौन से अधिकारी हुए बाहर
इस पूरी परियोजना की निगरानी में कोताही बरतने के लिए जिन अधिकारियों को हटाया गया है उनमें निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, इंडिपेंडेंट इंजीनियर के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार और रेसिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार शामिल हैं। इन तीनों को अगले 2 साल तक सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और NHIDCL की किसी भी आगामी परियोजना में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया गया है।
26 जुलाई को आई थी पहली समस्या
पूरे मामले की शुरुआत 26 जुलाई 2026 को हुई, जब नियमित रूट पेट्रोलिंग के दौरान किमी-64 के आसपास सड़क की सतह में स्लिपेज दिखाई दिया। उस समय फौरन मरम्मत कार्य करवा लिया गया था। हालांकि, बाद में हुई अत्यधिक बारिश की वजह से किमी-64 के नजदीक कुछ अन्य हिस्सों में भी वैसी ही समस्या पैदा हो गई। फिलहाल इन हिस्सों को ठीक करने का काम युद्ध स्तर पर जारी है।
6 अगस्त तक सुधार का लक्ष्य
प्राधिकरण ने मानसून के चुनौतीपूर्ण मौसम को देखते हुए 6 अगस्त तक सभी मरम्मत कार्यों को पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। NHAI ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल उन स्थानों तक सीमित नहीं है जहां स्लिपेज हुआ है, बल्कि दैनिक निरीक्षण में जिन स्थानों पर ऐसी किसी संभावित समस्या के संकेत मिल रहे हैं, वहां भी पहले से ही सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी कोई विफलता न हो।
सरकारी खजाने पर शून्य भार
NHAI ने स्पष्ट किया है कि चूंकि यह परियोजना अभी रख-रखाव की अवधि में आती है, इसलिए इस मरम्मत का पूरा आर्थिक खर्च संबंधित रियायतग्राही कंपनी द्वारा वहन किया जा रहा है। सरकार या सरकारी खजाने पर इसका कोई वित्तीय भार नहीं पड़ेगा। प्राधिकरण ने निर्माण या डिजाइन की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों को सिरे से खारिज किया है और इसे केवल मानसून के दौरान होने वाला एक सामान्य रख-रखाव का मामला बताया है। वर्तमान में इस एक्सप्रेसवे पर आवाजाही पूरी तरह से सुरक्षित है और यातायात बिना किसी रुकावट के चल रहा है।
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