छत्तीसगढ़
2 घंटे पहले
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विकास की बाट जोहता पुसाझर गांव
छत्तीसगढ़ के उत्तर बस्तर कांकेर जिले में स्थित मुरागांव पंचायत के अंतर्गत आने वाला पुसाझर गांव आज भी घोर अभावों के बीच जीने को मजबूर है। पहाड़ों की गोद में बसे इस गांव की आबादी करीब 120 लोगों की है, जो लगभग 16 घरों में निवास करते हैं। यहाँ की भौगोलिक स्थिति और प्रशासनिक अनदेखी ने ग्रामीणों को बेहद मुश्किलों में डाल रखा है। गांव में न तो शिक्षा की बेहतर व्यवस्था है, न ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहाँ रहने वाले लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो उनके जीवन को बेहद कठिन बनाता है।
ग्रामीण बन गए आधुनिक मांझी
पुसाझर गांव की स्थिति ऐसी है कि यहाँ तक पहुंचने का मार्ग अत्यंत संकरा और दुर्गम है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने सरकार पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं ही मोर्चा संभाल लिया। जिस तरह दशरथ मांझी ने पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाया था, कुछ वैसा ही जज्बा यहाँ के निवासियों ने दिखाया है। ग्रामीणों ने अपनी जमा पूंजी और कड़े श्रमदान के जरिए पहाड़ों को काटकर एक रास्ता तैयार किया है ताकि गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से हो सके।
प्रशासन से मदद की उम्मीद
ग्रामीणों द्वारा तैयार किया गया यह कच्चा मार्ग इतना चौड़ा नहीं है कि उस पर ट्रैक्टर या निर्माण सामग्री ढोने वाले बड़े वाहन आसानी से आ-जा सकें। यही वजह है कि पक्के घर बनाने के लिए जरूरी सीमेंट, सरिया और रेत जैसी सामग्री गांव तक नहीं पहुंच पाती है। एक समय था जब यह इलाका नक्सलवाद के साये में था, जिसने विकास की गति को पूरी तरह रोक दिया था। अब जबकि हालात बेहतर हुए हैं, ग्रामीणों को उम्मीद है कि सरकार उनके द्वारा बनाए गए इस रास्ते को एक पक्की सड़क में तब्दील कर देगी। लोग आज भी सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनका गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके और उनकी अगली पीढ़ी को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
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