नौकरी की टेंशन खत्म: SBI RSETI दे रहा है 6 तरह की मुफ्त ट्रेनिंग, रहने और खाने की व्यवस्था भी फ्री; जानें कैसे लें एडमिशन करियर एक घंटा पहले 1
छतरपुर जिले के नौगांव में SBI RSETI द्वारा बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जुलाई 2026 से 6 नए व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स शुरू किए जा रहे हैं, जिसके लिए आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

यदि आप वर्तमान में बेरोजगार हैं और नौकरी की तलाश करने के बजाय खुद का कोई व्यवसाय या स्टार्टअप शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित भारतीय स्टेट बैंक के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (SBI RSETI), नौगांव द्वारा एक शानदार पहल की जा रही है। संस्थान द्वारा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के बेरोजगार युवाओं, गरीब महिलाओं और पुरुषों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 6 अलग-अलग प्रकार के निःशुल्क व्यावसायिक प्रशिक्षण कोर्स शुरू किए जा रहे हैं।

ये सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम जुलाई 2026 से प्रारंभ होने जा रहे हैं, जिनके लिए पंजीकरण यानी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन कोर्सों के माध्यम से युवा न केवल हुनरमंद बनेंगे, बल्कि उन्हें खुद का काम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता दिलाने में भी मदद की जाएगी।

इन 6 स्वरोजगार पाठ्यक्रमों में ले सकते हैं प्रवेश

SBI RSETI, नौगांव में पदस्थ फैकल्टी राजाराम कुशवाहा ने जानकारी देते हुए बताया कि जुलाई महीने से शुरू होने वाले इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मुख्य रूप से निम्नलिखित छह विषयों को शामिल किया गया है:

  • अगरबत्ती निर्माण प्रशिक्षण: इस कोर्स में अगरबत्ती बनाने की पूरी तकनीक और व्यवसाय प्रबंधन सिखाया जाएगा।
  • मोमबत्ती निर्माण प्रशिक्षण: मोमबत्ती बनाने और उनकी मार्केटिंग करने की कला सिखाई जाएगी।
  • उद्यम सखी प्रशिक्षण: महिलाओं को उद्यमिता और छोटे व्यवसायों के संचालन की बारीकियां समझाई जाएंगी।
  • कंप्यूटर अकाउंटिंग प्रशिक्षण: वित्तीय लेखा-जोखा रखने और कंप्यूटर पर अकाउंटिंग करने का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा।
  • नल फिटिंग (प्लंबिंग) प्रशिक्षण: प्लंबिंग के काम में रुचि रखने वाले युवाओं को इसका तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
  • औषधीय पौधों की खेती प्रशिक्षण: खेती-किसानी से जुड़े लोगों के लिए औषधीय पौधों की उन्नत खेती और उससे कमाई करने के तरीके सिखाए जाएंगे।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ये सभी छह विषय बहुत ही उपयोगी साबित हो सकते हैं। वर्तमान में बाजार में अगरबत्ती और मोमबत्ती की मांग काफी अधिक रहती है। वहीं गांवों और कस्बों में नल फिटिंग करने वाले कुशल कारीगरों की हमेशा कमी बनी रहती है। कंप्यूटर अकाउंटिंग सीखकर युवा किसी भी छोटी-बड़ी दुकान या संस्थान का लेखा-जोखा संभाल सकते हैं।

महिला और पुरुष आवेदकों के लिए अलग-अलग नियम

संस्थान द्वारा शुरू किए जा रहे इन कोर्सों में से कुछ कोर्स विशेष रूप से महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि कुछ में पुरुष और महिला दोनों भाग ले सकते हैं। इसकी विस्तृत रूपरेखा इस प्रकार है:

  • केवल महिलाओं के लिए: अगरबत्ती निर्माण, मोमबत्ती निर्माण, उद्यम सखी प्रशिक्षण और कंप्यूटर अकाउंटिंग जैसे कोर्स केवल महिला अभ्यर्थियों के लिए ही डिजाइन किए गए हैं।
  • केवल पुरुषों के लिए: नल फिटिंग (प्लंबिंग) का प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल पुरुष आवेदकों के लिए आयोजित किया जाएगा।
  • दोनों के लिए: औषधीय पौधों की खेती से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुरुष और महिला दोनों ही आवेदन कर सकते हैं।

पूरी तरह निःशुल्क रहेगी आवासीय और भोजन व्यवस्था

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से निःशुल्क है। राजाराम कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि चयनित प्रशिक्षणार्थियों को ट्रेनिंग के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसके अतिरिक्त, संस्थान परिसर में रहने के लिए आवासीय व्यवस्था और भोजन की व्यवस्था भी पूरी तरह मुफ्त रहेगी। चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब और जरूरतमंद युवाओं के लिए अन्य शहरों में जाकर रहना और पढ़ाई का खर्च उठाना संभव नहीं हो पाता, इसीलिए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में रहने और खाने की पूरी व्यवस्था संस्थान द्वारा ही संभाली जाएगी। प्रतिभागियों को केवल अपने पहनने के कपड़े और व्यक्तिगत उपयोग का आवश्यक सामान साथ लेकर आना होगा, बाकी सभी आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह निःशुल्क रहेंगी।

प्रवेश के लिए क्या हैं पात्रता शर्तें और आयु सीमा?

संस्थान ने इन निःशुल्क पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कुछ जरूरी पात्रता शर्तें तय की हैं, जो इस प्रकार हैं:

  • निवास स्थान: आवेदक अनिवार्य रूप से छतरपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र का स्थायी निवासी होना चाहिए।
  • आयु सीमा: आवेदक की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
  • शैक्षणिक योग्यता: आवेदक की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कम से कम 5वीं पास होनी जरूरी है। हालांकि, अलग-अलग कोर्स के लिए यह योग्यता 5वीं, 8वीं और 10वीं पास तय की गई है। विशेष रूप से कंप्यूटर अकाउंटिंग कोर्स के लिए आवेदक का न्यूनतम 10वीं पास होना अनिवार्य है।
  • आर्थिक पात्रता: उम्मीदवार के पास गरीबी रेखा से नीचे (BPL) का कार्ड, खाद्यान्न पर्ची या मनरेगा जॉब कार्ड होना आवश्यक है।

'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर होगा चयन

SBI RSETI नौगांव द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इन सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सीटों की संख्या सीमित है। प्रत्येक प्रशिक्षण कोर्स में अधिकतम 35 प्रतिभागियों को ही शामिल किया जाएगा। इस वजह से प्रवेश प्रक्रिया में 'पहले आओ और पहले पाओ' का नियम लागू रहेगा। जो अभ्यर्थी पहले अपना पंजीकरण करवाएंगे, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। यद्यपि अभी तक प्रशिक्षण शुरू होने का सटीक विस्तृत शेड्यूल जारी नहीं किया गया है, लेकिन इसके लिए पंजीकरण तुरंत शुरू कर दिए गए हैं ताकि समय पर बैच तैयार किए जा सकें। इसके अलावा संस्थान के विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा प्रशिक्षण के दौरान उद्यमिता विकास, व्यावसायिक योजना बनाने और व्यापार संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी जाएंगी।

ट्रेनिंग के बाद मिलेगा लोन, ऐसे करें संपर्क

इस कोर्स का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि युवाओं को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाना है। प्रशिक्षण की अवधि सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद सभी सफल प्रतिभागियों को सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। इस प्रमाण पत्र की मदद से वे बैंक से आसानी से लोन ले सकते हैं। संस्थान स्वयं भी इसमें मदद करेगा। प्रशिक्षण के बाद सभी प्रतिभागियों से सरकारी ऋण योजनाओं और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण के लिए आवेदन फॉर्म भरवाए जाएंगे। इन आवेदनों को संबंधित बैंकों में भेजा जाएगा, ताकि अभ्यर्थियों को आसानी से पूंजी मिल सके और वे अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकें।

इस निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने या अपना रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए इच्छुक उम्मीदवार नीचे दिए गए मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:

  • 9424970039
  • 9926201837
  • 7692090407
  • 8962337729
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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