मध्य प्रदेश
एक महीने पहले
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विचारों
इंदौर ड्रग्स मामले में गर्माया सियासी माहौल
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में इन दिनों ड्रग्स का एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले लिया है। इस मामले में कांग्रेस की प्रदेश इकाई के प्रमुख जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी को जब राजेंद्र नगर पुलिस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, तो हर तरफ हलचल मच गई। हिरासत में लिए जाने और उसके बाद मीडिया के सामने आकर दी गई सफाई ने कई सवालों को जन्म दिया है। नाना पटवारी ने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि अपने व्यक्तिगत अतीत को लेकर भी एक बड़ा खुलासा किया है।
टाइगर इज बैक वीडियो और विवादों की शुरुआत
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब गुरुवार की सुबह राजेंद्र नगर पुलिस ने नाना पटवारी को पूछताछ के लिए अपने साथ ले लिया। पुलिस का उस वक्त यही कहना था कि यह एक प्रारंभिक प्रक्रिया है और जांच के नतीजों के आधार पर ही आगे कोई कदम उठाया जाएगा। हालांकि, पूछताछ के बाद जब उन्हें रिहा किया गया, तो उन्होंने सोशल मीडिया पर 'टाइगर इज बैक' का एक वीडियो पोस्ट किया, जिसने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी। इस मामले में यह बात भी सामने आई कि नाना पटवारी के खिलाफ राजेंद्र नगर थाने में नौ अलग-अलग मामले दर्ज हैं। हालांकि, कांग्रेस पार्टी का दावा है कि इनमें से अधिकतर मुकदमे राजनीतिक प्रदर्शनों और जन आंदोलनों से जुड़े हुए हैं और कुछ में तो वे पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं।
पुलिस की पूछताछ और नाना पटवारी के आरोप
पहली बार मीडिया के सामने आए नाना पटवारी ने दावा किया कि उनके साथ पुलिस ने ठीक बर्ताव नहीं किया। उन्होंने बताया कि वह अपनी गाड़ी की सर्विसिंग कराने जा रहे थे, तभी सन साइन सिटी कॉलोनी के पास पुलिस ने उन्हें रोका और अपने साथ ले गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा दिन पुलिस उन्हें अपनी गाड़ी में बिठाकर घुमाती रही, लेकिन ड्रग्स मामले को लेकर एक भी सवाल नहीं किया गया। जब उनसे पूछा गया कि आखिर पुलिस ने उन्हें क्यों उठाया, तो उन्होंने कोई स्पष्ट कारण न होने की बात कही।
ड्रग्स मामले में पकड़े गए आरोपियों के साथ संबंधों पर भी उन्होंने सफाई पेश की। नाना पटवारी ने बताया कि जो लोग पकड़े गए हैं, उनमें से कुछ पहले उनके कार्यकर्ता रह चुके हैं और चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी के लिए काम किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि संजय कौशल का एक सर्विस सेंटर है, जहां वे अपनी गाड़ियां धुलवाने और सर्विस के लिए भेजते हैं, इसीलिए संजय से उनकी बातचीत होती थी। नाना पटवारी ने जोर देकर कहा कि इसके अलावा उनका किसी भी ड्रग्स रैकेट से कोई लेना-देना नहीं है और पुलिस ने भी इस संबंध में उनसे कोई पूछताछ नहीं की।
अतीत की लत पर खुलकर बोले नाना पटवारी
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू तब सामने आया जब नाना पटवारी ने अपने बीते कल को लेकर खुद ही बड़ी बात स्वीकार की। उन्होंने खुलकर बताया कि लगभग तीन साल पहले तक वे ड्रग्स का सेवन किया करते थे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले तीन सालों से उन्होंने पूरी तरह से नशा छोड़ दिया है। उन्होंने कहा, 'अब मैं न तो ड्रग्स लेता हूं और न ही शराब को हाथ लगाता हूं।' अपने ऊपर लगे तमाम आरोपों को उन्होंने निराधार बताते हुए इसे अपने खिलाफ रची गई एक साजिश करार दिया।
दूसरी ओर, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार को जानबूझकर प्रताड़ित किया जा रहा है और वे पहले से ही इसके लिए तैयार थे। जीतू पटवारी ने स्पष्ट कर दिया कि यदि सरकार को उन्हें परेशान करने में संतुष्टि मिलती है, तो वे जेल जाने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।
कानूनी सलाहकार का पक्ष
जीतू पटवारी के कानूनी सलाहकार ने भी नाना पटवारी पर दर्ज नौ मामलों का विस्तृत ब्योरा पेश किया है। उनके अनुसार:
- कुल नौ मामलों में से पांच मुकदमे किसानों के समर्थन में किए गए आंदोलनों से संबंधित हैं।
- दो मामले चुनाव के दौरान थाने के घेराव के हैं, जिनमें नाना पटवारी की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।
- एक मामला जमीन से जुड़े विवाद का है, जिसमें उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।
- शेष दो मामलों में वे अदालत द्वारा बरी किए जा चुके हैं।
फिलहाल, पुलिस इस ड्रग्स मामले की तह तक जाने के लिए जांच को आगे बढ़ा रही है। दूसरी तरफ, कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई मान रही है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच में कोई ठोस सबूत सामने आता है या यह विवाद और गहराता जाएगा।
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