जहानाबाद के रोहित का कमाल, गांव के खेल मैदान से रग्बी की नेशनल ट्रॉफी तक का शानदार सफर बिहार एक महीने पहले 39
जहानाबाद के 16 वर्षीय रोहित कुमार ने हैदराबाद में आयोजित नेशनल रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर बिहार का मान बढ़ाया है। कबड्डी से खेल की शुरुआत करने वाले रोहित ने कड़ी मेहनत और लगन से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है।

बिहार का गौरव बना जहानाबाद का युवा

बिहार के जहानाबाद जिले के युवा न केवल शैक्षिक मोर्चों पर सफलता प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि खेल जगत में भी अपनी धाक जमा रहे हैं। जिले के प्रतिभावान खिलाड़ी अपनी कड़ी मेहनत के दम पर न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी जिले और राज्य का नाम गर्व से ऊंचा कर रहे हैं। इसी प्रतिभाशाली युवाओं की श्रेणी में रोहित कुमार का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जिन्होंने हाल ही में रग्बी जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। रोहित का निवास स्थान जिला मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित है, जहाँ से उन्होंने अपनी मेहनत का सफर तय किया है।

राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बिहार की शानदार जीत

हाल ही में हैदराबाद में अंडर 18 नेशनल रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देश भर की कुल 27 टीमों ने अपनी चुनौती पेश की थी। बिहार की टीम ने पूरे टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया और फाइनल का रास्ता साफ किया। खिताबी मुकाबले में बिहार की टीम ने महाराष्ट्र की टीम को शिकस्त देकर ट्रॉफी पर अपना कब्जा जमाया। इस जीत में बिहार की 12 सदस्यीय टीम की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। गौर करने वाली बात यह है कि फाइनल मैच जीतने वाली उस 7 सदस्यीय अंतिम खिलाड़ी टीम में रोहित कुमार भी शामिल थे, जिन्होंने जीत दिलाने में बड़ी जिम्मेदारी निभाई।

कबड्डी से रग्बी तक का सफर

16 वर्षीय रोहित कुमार जहानाबाद के शकूराबाद बाजार इलाके के निवासी हैं। खेल की दुनिया में उनका प्रवेश लगभग 4 साल पहले हुआ था। शुरुआत में रोहित का रुझान कबड्डी खेल की ओर अधिक था और वह उसी में अपना भविष्य तलाश रहे थे। उस समय उन्हें यह अंदाजा भी नहीं था कि वह कभी राष्ट्रीय स्तर पर किसी खेल का प्रतिनिधित्व करेंगे। वह जिस मैदान पर नियमित रूप से कबड्डी का अभ्यास किया करते थे, वहीं अन्य बच्चों को एक कोच रग्बी का प्रशिक्षण दे रहे थे। वहीं कोच की नजर रोहित पर पड़ी और उन्होंने रोहित की शारीरिक ऊर्जा और खेल के प्रति जज्बे को देखकर उन्हें रग्बी आजमाने की सलाह दी।

कड़ी मेहनत और सफलता का स्वाद

कोच की सलाह ने रोहित के खेल जीवन की दिशा ही बदल दी। उन्होंने कबड्डी छोड़कर रग्बी के गुर सीखना शुरू किया। इसके लिए उन्होंने सुबह-शाम मैदान पर जमकर पसीना बहाया। हालांकि, खेल आसान नहीं था और शुरुआती 2 साल तक उन्हें रग्बी के लिए आयोजित टेस्ट में सफलता नहीं मिल सकी। लेकिन रोहित ने हार नहीं मानी और अपनी तैयारियों को जारी रखा। इस साल हैदराबाद में हुए टूर्नामेंट के लिए उन्होंने कठिन मेहनत की और चयन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर लिया। इस तरह उन्हें नेशनल रग्बी फुटबॉल टूर्नामेंट खेलने का पहला बड़ा अवसर मिला।

परिवार और भविष्य का लक्ष्य

रोहित कुमार ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनका खेलों के प्रति लगाव 10 साल की उम्र से ही रहा है। उन्होंने कहा, मुझे खेल का इतना शौक था कि कई बार खेल के चक्कर में पढ़ाई से ध्यान भटक जाता था, जिसके लिए घर पर डांट भी सुननी पड़ती थी। बाद में जब मेरे बड़े भाई को मेरे खेल के प्रति जुनून के बारे में पता चला, तो उन्होंने मेरा काफी सहयोग किया। अब स्थिति यह है कि टूर्नामेंट जीतकर घर लौटने पर हर कोई उनकी प्रशंसा कर रहा है और परिवार भी उन्हें पूरा समर्थन देने को तैयार है। रोहित का अगला बड़ा सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रग्बी खेलना है।

कोच को है भविष्य की उम्मीद

रोहित के कोच विकास कुमार उनके प्रदर्शन से काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि रोहित एक अत्यंत होनहार खिलाड़ी है। यदि उसे सही मार्गदर्शन और अवसर मिलते रहे, तो वह आने वाले समय में न केवल जिले बल्कि देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर सकता है। कोच का मुख्य जोर रोहित को एक बड़े मंच पर ले जाने और उसकी छुपी हुई प्रतिभा को और अधिक निखारने पर है ताकि वह भविष्य में और भी बेहतर परिणाम दे सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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