जेरेड कुशनर पर अरबों की फंडिंग और भाड़े के सैनिकों को भुगतान का गंभीर आरोप, क्या है पूरा विवाद? विश्व 2 घंटे पहले 5
डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर पर एक किताब के जरिए गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने दुबई के बैंक खातों का उपयोग कर भाड़े के सैनिकों को पैसे भेजे थे। इन दावों के बाद संयुक्त अरब अमीरात से लेकर अमेरिका तक हलचल मच गई है, हालांकि कुशनर ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

जेरेड कुशनर और विवाद का केंद्र

डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह कोई सामान्य राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि अरबों की फंडिंग और भाड़े के सैनिकों को भुगतान से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज दावा है। इस खुलासे के बाद से संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE से लेकर अमेरिका और यूरोप तक हड़कंप मच गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि कुशनर का संबंध UAE, सऊदी अरब और इजरायल के कुछ संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से रहा है। इन आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जेरेड कुशनर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबी पोस्ट साझा की है और खुद पर लगे तमाम इल्जामों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है।

भाड़े के सैनिकों को फंड ट्रांसफर का दावा

इस पूरे मामले की शुरुआत मैथ्यू कोल द्वारा लिखी गई किताब 'प्रिंसिस एंड थीव्स: जेरेड कुशनर एंड मोहम्मद बिन जायद्स सीक्रेट प्लॉट टू रीमेक द मिडिल ईस्ट' से हुई है। इस पुस्तक के कुछ अंशों को 'वैनिटी फेयर' ने अपनी एक रिपोर्ट में प्रकाशित किया है। किताब में लेखक ने एक भरोसेमंद सूत्र का हवाला देते हुए लिखा है कि वर्ष 2020 में डच अधिकारियों ने जेरेड कुशनर के फोन की गतिविधियों पर नजर रखी थी। रिपोर्ट के अनुसार, जब कुशनर दुबई के एक बैंक खाते का इस्तेमाल कर रहे थे, तब यह देखा गया कि अजरबैजान के एक बैंक से उस खाते में करोड़ों डॉलर की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर की गई थी। दावा किया गया है कि कुशनर ने इस दुबई स्थित खाते से बड़ी रकम युद्ध के सरगनाओं, भाड़े के सैनिकों और यहाँ तक कि एक ऐसे व्यक्ति को भी भुगतान की थी, जिसका इतिहास एक पेशेवर हत्यारे के रूप में रहा है।

सूत्रों की पुष्टि और कानूनी पक्ष

मैथ्यू कोल ने अपनी किताब में आगे विस्तार से लिखा है कि शुरुआत में उन्हें यह कहानी अविश्वसनीय और बेतुकी लगी थी। हालांकि, छह महीने बाद जब वे किसी अन्य व्यक्ति के साथ UAE सरकार द्वारा मध्य-पूर्व और अफ्रीका में भाड़े के सैनिकों को तैनात करने की रणनीति पर चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने कुशनर और दुबई वाले बैंक खाते का जिक्र छेड़ दिया। लेखक का दावा है कि उनके परिचित ने इस लेनदेन की पुष्टि करते हुए अपनी सहमति जताई। दूसरी ओर, जेरेड कुशनर की कानूनी टीम ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनके वकीलों का स्पष्ट कहना है कि ऐसा कोई भी बैंक खाता अस्तित्व में ही नहीं था, जिसका इस्तेमाल कुशनर ने इस तरह के लेन-देन के लिए किया हो।

कुशनर की सफाई: आरोपों को बताया कल्पना

आरोपों का जवाब देते हुए जेरेड कुशनर ने कहा कि 'वैनिटी फेयर' ने जिस किताब के अंश प्रकाशित किए हैं, वे सरासर गलत और मनगढ़ंत हैं। उन्होंने कहा कि लेखक द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन करने के लिए एक भी ठोस सबूत मौजूद नहीं है। कुशनर के अनुसार, इस रिपोर्ट में कोई बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजैक्शन की तारीखें, अकाउंट नंबर या वायर ट्रांसफर का रिकॉर्ड नहीं दिया गया है, जो इन दावों की सत्यता को सिद्ध कर सके। उन्होंने इसे पत्रकारिता के नाम पर फैलाई गई एक कल्पना मात्र करार दिया है।

जांच का हवाला देते हुए कुशनर का पलटवार

जेरेड कुशनर ने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान वे दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में से एक थे, जिनकी सबसे कड़ी निगरानी की गई थी। उन्होंने संसदीय जांचों और स्पेशल काउंसिल द्वारा की गई पड़ताल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने स्वेच्छा से लगभग 30 घंटे से अधिक की गवाही दी थी। कुशनर ने कहा कि यदि ये आरोप सही होते, तो जांच एजेंसियों को कभी न कभी इसका प्रमाण मिलता। उन्होंने लेखक की मानसिक स्थिति पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह सब किसी गहरी साजिश या दुर्भावनापूर्ण इरादे से लिखा गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले इस साल जनवरी में रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के दौरान कुशनर की पुतिन के साथ क्रेमलिन में हुई मुलाकात भी सुर्खियों में रही थी।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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