जमशेदपुर के स्कूली छात्रों का कमाल, अब स्मार्ट पंखा खुद तय करेगा कूलिंग झारखंड 50 मिनट पहले 1
झारखंड के जमशेदपुर में स्कूली बच्चों ने एक अनोखा स्मार्ट कूलिंग सिस्टम तैयार किया है, जो कमरे के तापमान को भांपकर पंखे की गति को स्वतः नियंत्रित करता है।

स्कूली बच्चों का नवाचार

झारखंड के जमशेदपुर स्थित हिल टॉप स्कूल के कक्षा 9 के मेधावी छात्रों ने तकनीक की दुनिया में एक बड़ा कारनामा कर दिखाया है। इन छात्रों ने एक ऐसा टेंपरेचर कंट्रोल स्मार्ट कूलिंग सिस्टम विकसित किया है, जो बिजली की खपत को कम करने में बेहद प्रभावी साबित हो सकता है। यह डिवाइस किसी भी सामान्य पंखे को स्मार्ट पंखे में बदलने की क्षमता रखता है, जो कमरे में मौजूद तापमान के आधार पर अपनी गति को कम या ज्यादा करने में सक्षम है।

काम करने का अनूठा तरीका

इस प्रोजेक्ट से जुड़े छात्र अर्जुन मिश्रा ने इस तकनीक के पीछे की सोच को साझा करते हुए बताया कि अक्सर गर्मी के दिनों में लोग पंखों को तेज गति पर छोड़कर भूल जाते हैं, जिससे बिजली तो बर्बाद होती ही है, साथ ही पंखे की मोटर पर भी अनावश्यक लोड पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिए उनकी टीम ने इस स्मार्ट डिवाइस का प्रोटोटाइप तैयार किया है।

इस उपकरण की सबसे बड़ी खासियत इसमें लगा तापमान सेंसर है। यह सेंसर लगातार कमरे के वातावरण को मॉनिटर करता रहता है। जैसे ही कमरे का तापमान बढ़ता है, यह सिस्टम पंखे की गति को बढ़ा देता है और जैसे ही तापमान में गिरावट आती है, यह पंखे की स्पीड को स्वतः धीमा कर देता है। इस पूरी प्रक्रिया के कारण उपभोक्ताओं को बार-बार रेगुलेटर बदलने की मशक्कत नहीं करनी पड़ती है।

प्रौद्योगिकी और भविष्य की राह

इस प्रोटोटाइप को बनाने के लिए छात्रों ने अत्याधुनिक माइक्रोकंट्रोलर, सेंसर और प्रोग्रामिंग तकनीक का सहारा लिया है। यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक सिस्टम है जो इंसानी दखल के बिना काम करता है। छात्रों की टीम का मानना है कि इस तकनीक का दायरा केवल छत वाले पंखों तक ही सीमित नहीं है। भविष्य में इस स्मार्ट कूलिंग तकनीक को लैपटॉप, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कूलिंग सिस्टम में भी इंटीग्रेट किया जा सकता है, ताकि उपकरणों की उम्र बढ़ाई जा सके।

बिजली की बचत और लागत

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा की खपत को कम करना है। चूंकि पंखा केवल आवश्यकतानुसार ही तेज चलेगा, इसलिए बिजली का अनावश्यक अपव्यय पूरी तरह से रुक जाएगा। इसके अतिरिक्त, पंखे की मोटर पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी कम हो जाएगा, जिससे उसकी कार्यक्षमता बनी रहेगी और वह लंबे समय तक सुचारू रूप से कार्य कर सकेगा।

छात्रों के अनुसार, यदि इस प्रोटोटाइप को व्यावसायिक स्तर पर विकसित करके बाजार में उतारा जाए, तो इसकी संभावित कीमत लगभग 1500 रुपये हो सकती है। इतनी कम लागत में स्मार्ट तकनीक की उपलब्धता इसे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए भी एक किफायती विकल्प बनाती है।

युवा पीढ़ी की सोच

हिल टॉप स्कूल के इन छात्रों का यह प्रयास यह साबित करता है कि आज की युवा पीढ़ी केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है। वे अपनी तकनीकी समझ का उपयोग रोजमर्रा की समस्याओं को हल करने में कर रहे हैं। ऊर्जा संरक्षण और स्मार्ट तकनीक के मेल से तैयार किया गया यह प्रोजेक्ट न केवल सराहनीय है, बल्कि भविष्य के स्मार्ट घरों के लिए एक प्रेरणा भी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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