जम्मू-कश्मीर
47 मिनट पहले
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नशे के खिलाफ पुलिस का कड़ा रुख
जम्मू-कश्मीर में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। कश्मीर रेंज के आईजीपी सुजीत कुमार ने एक प्रेस वार्ता के दौरान इस अभियान से जुड़ी अहम जानकारियों साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने 1,711 किलोग्राम नशीले पदार्थों को बड़ी सफलता के साथ जब्त किया है। नशे की इस बड़ी खेप को बरामद करने के साथ-साथ पुलिस ने अलग-अलग मामलों में कुल 1,941 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो इस अवैध धंधे से जुड़े हुए थे।
संपत्ति पर वार और फसलों का विनाश
पुलिस की यह कार्रवाई केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने नशे के कारोबार की आर्थिक कमर तोड़ने का भी काम किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ की गई कार्रवाई में 1.10 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अतिरिक्त, तस्करों से जुड़े 567 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है, जिनमें 1.71 करोड़ रुपये की धनराशि जमा थी।
खेती के स्तर पर भी पुलिस ने बड़ा कदम उठाते हुए पूरे कश्मीर में लगभग 2,116 जगहों पर अवैध नशीली फसलों को नष्ट कर दिया है। पुलिस के मुताबिक, लगभग 2,111 कनाल भूमि पर उगाई गई इन फसलों को बर्बाद किया गया है। इस पूरे अभियान के दौरान पुलिस ने नशीले पदार्थों के खिलाफ कुल 154 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त की है और 1,500 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
आतंकवाद और नशे का गहरा संबंध
पुलिस ने अपनी जांच में एक गंभीर चिंता जाहिर की है कि नशे के इस कारोबार से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल आतंकवाद और अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। आईजीपी सुजीत कुमार के शब्दों में, नशे के इस व्यापार से जो पैसा आता है, उसका उपयोग किंगपिन अपने अंडरग्राउंड वर्कर्स को फंडिंग देने के लिए करते हैं। चाहे ये तस्कर घाटी के भीतर सक्रिय हों या सीमा पार से अपना नेटवर्क चला रहे हों, इस कमाई का मकसद व्यवस्था को अस्थिर करना है। पुलिस ने जब्त की गई सारी सामग्री को अपने नियंत्रण में ले लिया है और जांच जारी है।
साइबर जालसाजों पर भी कसी नकेल
नशे के खिलाफ लड़ाई के साथ-साथ, पुलिस ने साइबर अपराधों पर भी बड़ा प्रहार किया है। पिछले कुछ महीनों में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े 54 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों का पता चला है। इन मामलों में 93 एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस ने इन धोखाधड़ी के मामलों में लगभग 13 से 14 प्रतिशत रकम बरामद कर ली है और 7 करोड़ रुपये से अधिक की राशि पीड़ितों को वापस लौटा दी गई है।
आईजीपी ने आगाह किया कि साइबर अपराधी अक्सर स्थानीय युवाओं को मोहरे के रूप में इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें 'म्यूल बैंक अकाउंट' में फंसाया जाता है। उन्होंने विशेष रूप से बुजुर्गों और कमजोर लोगों को निशाना बनाने वाले गिरोहों के प्रति सचेत रहने की अपील की है।
युवाओं से अपील और सुरक्षा का भरोसा
प्रशासन ने नशे की लत से जूझ रहे युवाओं से भावुक अपील की है कि वे इसे अपनी नियति न मानें। सुजीत कुमार ने कहा कि युवा समाज का भविष्य हैं और उन्हें इन गिरोहों का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। उन्होंने नशा पीड़ितों से आग्रह किया कि वे बिना किसी संकोच के पुलिस स्टेशन या रिहैबिलिटेशन सेंटर जाकर मदद लें।
पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि मुखबिरों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि जो भी व्यक्ति नशे या साइबर अपराधों के खिलाफ जानकारी देगा, उसकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। इससे पहले श्रीनगर में भी एक बड़े ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें 8 लोग गिरफ्तार किए गए थे। पुलिस अब इस तंत्र को पूरी तरह समाप्त करने के लिए तत्पर है।
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