राजस्थान
एक घंटा पहले
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विचारों
बीजेपी का अकेले चुनाव लड़ने का फैसला
पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया ने जयपुर में एक महत्वपूर्ण बयान जारी करते हुए कहा है कि पंजाब में पार्टी किसी भी अन्य राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बीजेपी राज्य की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। सतीश पूनिया ने यह टिप्पणी जयपुर में नगरीय निकाय चुनाव के दौरान अपना वोट डालने के बाद की।
कांग्रेस की आंतरिक कलह पर तंज
सतीश पूनिया ने पंजाब की विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां नेतृत्व को लेकर घमासान मचा हुआ है। उन्होंने कहा कि पंजाब में कांग्रेस पूरी तरह से आंतरिक कलह में उलझी हुई है। पूनिया का मानना है कि केवल प्रभारी बदलने भर से कांग्रेस की समस्याएं खत्म नहीं होंगी और वहां चल रही गुटबाजी और लड़ाई कम नहीं होगी। उनका कहना है कि पंजाब की जनता ने कांग्रेस की कार्यशैली को देख लिया है और वहां के हालात अब बदलाव की मांग कर रहे हैं।
नशे के खिलाफ बीजेपी का एजेंडा
सतीश पूनिया ने पंजाब के सबसे संवेदनशील मुद्दे यानी नशे पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि नशा पंजाब की सुख-शांति और भाईचारे के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। राज्य की पुरानी पहचान को नशे की समस्या ने गहरा धक्का पहुंचाया है। पूनिया के अनुसार, बीजेपी पंजाब में जल्द ही अपनी यात्रा शुरू करने वाली है, जिसमें इस समस्या की वास्तविक तस्वीर जनता के सामने आएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि पंजाब में बीजेपी की सरकार बनती है, तो नशीले पदार्थों के खिलाफ अत्यंत ठोस और निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री के चेहरे पर सतीश पूनिया का रुख
पंजाब में चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चल रही चर्चाओं पर पूनिया ने विराम लगाते हुए कहा कि पार्टी किसी एक चेहरे को आगे करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी का पूरा ध्यान संगठनात्मक मजबूती और जनता से जुड़े मुद्दों पर है। सतीश पूनिया को हाल ही में पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया है, जिसके बाद से उन्होंने वहां अपनी चुनावी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है।
राजस्थान के नेताओं की पंजाब की राजनीति में दस्तक
पंजाब की राजनीति में दिलचस्प मोड़ तब आया है जब राजस्थान के दो बड़े नेता अब आमने-सामने हैं। बीजेपी ने सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया है, तो वहीं कांग्रेस ने भी अपनी रणनीति बदलते हुए पंजाब का जिम्मा सचिन पायलट को सौंपा है। गौर करने वाली बात यह है कि पूनिया और पायलट दोनों ही राजस्थान में अपनी-अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अब दोनों नेता पंजाब की सत्ता हासिल करने के लिए एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी व्यूह रचना तैयार कर रहे हैं।
सतीश पूनिया का हरियाणा मॉडल और चुनावी समीकरण
सतीश पूनिया के संगठन कौशल को देखते हुए बीजेपी ने उन पर भरोसा जताया है। इससे पहले सतीश पूनिया हरियाणा में भी पार्टी की कमान संभाल चुके हैं और वहां बीजेपी ने अपनी सरकार को दोबारा दोहराने में सफलता हासिल की थी। पूनिया की उस सफलता को आधार मानकर पार्टी अब उनके अनुभव का लाभ पंजाब में उठाना चाहती है। सतीश पूनिया जाट समुदाय से आते हैं, जो हरियाणा की राजनीति में महत्वपूर्ण है। वहीं, पंजाब में बड़ी संख्या में जट सिख आबादी है, जो चुनावी गणित के लिहाज से बेहद प्रभावशाली मानी जाती है। बीजेपी को उम्मीद है कि पूनिया की रणनीति पंजाब के जटिल सियासी समीकरणों को साधने में मददगार साबित होगी।
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