राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर पाबंदी का आदेश, POCSO केस की चेतावनी से सियासत गरमाई राजस्थान एक घंटा पहले 6
राजस्थान शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और वीडियो बनाने पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को लेकर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। विपक्ष ने इसे स्कूलों की बदहाली छिपाने की कोशिश करार दिया है, जबकि मंत्री मदन दिलावर ने इसे बच्चों की सुरक्षा और निजता के लिए जरूरी बताया है।

राजस्थान में स्कूलों के भीतर सुरक्षा और गोपनीयता का नया नियम

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप, फोटो खींचने और वीडियो बनाने को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों ने प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। विभाग के नए आदेशों के अनुसार, अब किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर के भीतर वीडियो बनाने, तस्वीरें खींचने, इंटरव्यू लेने या लाइव स्ट्रीमिंग करने से पहले संबंधित स्कूल के प्रधानाचार्य से लिखित में अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस आदेश ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज कर दी है।

विवाद की जड़ में POCSO और अन्य कानूनी धाराओं का उल्लेख

यह मामला तब और गंभीर हो गया जब जयपुर के गांधी नगर स्थित गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल सहित कई अन्य स्कूलों के प्रवेश द्वार पर विभाग के आदेशों के तहत नोटिस चस्पा किए गए। इन नोटिसों में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति स्कूल परिसर में ऐसी गतिविधियां करता है, तो उसके खिलाफ POCSO एक्ट, IT एक्ट और JJ एक्ट की धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी कानूनी चेतावनी ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है।

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का स्पष्टीकरण

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने कुछ लोगों के माध्यम से यह सुना है कि स्कूलों में प्रवेश करने और रिकॉर्डिंग करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंत्री ने स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार ने ऐसा कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि यह कदम बच्चों की सुरक्षा और उनकी निजता को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। उनके अनुसार, स्कूल में बच्चों के सुरक्षित वातावरण को सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

दिशा-निर्देशों के मुख्य बिंदु

शिक्षा विभाग द्वारा 16-17 अगस्त को जारी किए गए इन निर्देशों में विस्तार से जानकारी दी गई है कि स्कूलों में आने वाले आगंतुकों के लिए क्या नियम रहेंगे:

  • स्कूल में आने वाले प्रत्येक बाहरी व्यक्ति की जानकारी विजिटर रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य है।
  • अनुमति मिलने के बावजूद, बाहरी व्यक्ति को पूरे स्कूल परिसर में अकेले घूमने की छूट नहीं होगी। उन्हें हमेशा किसी शिक्षक, स्टाफ सदस्य या प्रधानाचार्य की उपस्थिति में ही रहना होगा।
  • क्लासरूम, टॉयलेट, लैब और हॉस्टल जैसे संवेदनशील स्थानों पर किसी भी बाहरी व्यक्ति के अकेले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • विभाग ने इसके लिए 'इन लोको पेरेंटिस' यानी माता-पिता की अनुपस्थिति में बच्चों के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाले सिद्धांत का हवाला दिया है।

बच्चों की सुरक्षा का तर्क

मंत्री मदन दिलावर ने तर्क दिया कि नाबालिग बच्चों की फोटो खींचने या उनके बयान लेने से पूर्व अभिभावकों की अनुमति प्राप्त करना कानूनी और नैतिक रूप से जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब बच्चे विद्यालय परिसर में होते हैं, तो उनकी सुरक्षा का पूरा दायित्व शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन पर होता है। यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति अंदर आकर बच्चों से अनावश्यक प्रश्न पूछकर उनकी निजता को प्रभावित करता है, तो यह कतई स्वीकार्य नहीं है। विद्यालय संस्था प्रधान को यह सुनिश्चित करना होगा कि बच्चों के अधिकारों का किसी भी स्थिति में उल्लंघन न हो।

विपक्ष का तीखा हमला और तानाशाही का आरोप

सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति को जनता के सामने आने से रोकने के लिए यह कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी ऊर्जा स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने में लगानी चाहिए, न कि सच्चाई को उजागर करने वालों को रोकने में।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे सरकार की तानाशाही बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतें और संसाधनों की कमी को छिपाने के लिए डर रही है। जूली ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार अब जेन जेड के बाद जेन अल्फा से भी खौफ खाने लगी है। उन्होंने मांग की कि इस आदेश को तुरंत वापस लिया जाए, अन्यथा कांग्रेस पार्टी द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

सुरक्षा बनाम हकीकत का मुद्दा

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजस्थान के सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी और जर्जर भवनों की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। एक तरफ विभाग का दावा है कि बच्चों को बाहरी लोगों के हस्तक्षेप से बचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष का यह मानना है कि स्कूलों की कमियां छिपाने के लिए बच्चों की सुरक्षा का ढाल बनाया जा रहा है। कुल मिलाकर, स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर लागू किए गए ये कड़े नियम अब एक सियासी जंग का केंद्र बन गए हैं, जिसका समाधान अभी दूर नजर आ रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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