मीनाक्षी नटराजन का नामांकन विवाद: जबलपुर हाई कोर्ट ने महेश केवट समेत इन दो राज्यसभा सांसदों को भेजा नोटिस मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के मामले में जबलपुर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए भाजपा के तीन नवनिर्वाचित सांसदों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 11 अगस्त को तय की गई है।

हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से जुड़े बहुचर्चित प्रकरण में जबलपुर हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। कांग्रेस की दिग्गज नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार और रिटर्निंग ऑफिसर सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की एकल पीठ ने इस मामले में दखल देते हुए अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है।

इन नेताओं की बढ़ी मुश्किलें

इस कानूनी घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। खास बात यह है कि हाई कोर्ट ने केवल महेश केवट को ही नहीं, बल्कि तरुण चुघ और रजनीश कुमार अग्रवाल को भी नोटिस जारी किया है। जून 2026 में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा के ये तीनों उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे। अब अदालत के नोटिस के बाद इन तीनों सांसदों के निर्वाचन की वैधानिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

नामांकन रद्द होने की पूरी कहानी

विवाद की शुरुआत जून 2026 में हुई थी जब मीनाक्षी नटराजन ने कांग्रेस की ओर से राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर 8 जून को अपना नामांकन दाखिल किया था। हालांकि, 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका पर्चा खारिज कर दिया। अधिकारी ने तर्क दिया कि नटराजन ने अपने हलफनामे में हैदराबाद में दर्ज एक निजी आपराधिक शिकायत का ब्योरा नहीं दिया था। नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध विजयी घोषित कर दिए गए थे। उस दौरान कांग्रेस ने चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर जोरदार प्रदर्शन भी किया था, लेकिन तब कोई राहत नहीं मिली थी।

याचिका में उठाए गए सवाल

हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में मीनाक्षी नटराजन ने तर्क दिया है कि जिस निजी आपराधिक शिकायत का हवाला देकर उनका नामांकन निरस्त किया गया, उस पर किसी भी सक्षम अदालत ने न तो संज्ञान लिया था और न ही उनके खिलाफ कोई आरोप तय किए गए थे। उन्होंने दलील दी कि ऐसी स्थिति में उस शिकायत का खुलासा करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं था। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया, जो सीधे तौर पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।

11 अगस्त की सुनवाई पर टिकी नजरें

याचिका में यह गंभीर आरोप भी लगाया गया है कि जो उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, उनके स्वयं के चुनावी हलफनामों में भी गंभीर कमियां थीं, लेकिन उनके नामांकन को दरकिनार करते हुए स्वीकार कर लिया गया। फिलहाल, हाई कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है, लेकिन नोटिस जारी करना यह दर्शाता है कि अदालत मामले की गंभीरता को समझ रही है। अब सभी की निगाहें 11 अगस्त पर टिकी हैं, जब प्रतिवादी पक्ष अदालत के समक्ष अपना जवाब दाखिल करेंगे और इस कानूनी संग्राम का अगला पड़ाव तय होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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