ट्विशा शर्मा मामला: जमानत पाने के लिए रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मुख्य आरोपी और रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की है। इससे पहले भोपाल की निचली अदालत ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।

हाईकोर्ट में नई अर्जी

मध्य प्रदेश में सुर्खियों में रहे ट्विशा शर्मा हत्याकांड के मामले में मुख्य आरोपी और पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने अब अपनी स्वतंत्रता के लिए नया प्रयास किया है। गिरिबाला सिंह, जो इस मामले में ट्विशा की सास हैं, ने अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की शरण ली है और नियमित जमानत के लिए याचिका दाखिल की है। गौरतलब है कि इससे पूर्व भोपाल स्थित सत्र न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका को खारिज करते हुए कोई राहत देने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच सीबीआई कर रही है।

जेल में बंद है आरोपी सास

ट्विशा शर्मा मामले की मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इस प्रकरण में उनके बेटे और ट्विशा के पति समर्थ सिंह भी सलाखों के पीछे हैं। फिलहाल, जबलपुर स्थित हाईकोर्ट में गिरिबाला सिंह की ओर से लगाई गई जमानत याचिका किसी भी पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हो सकी है। अभी तक सुनवाई के लिए कोई विशिष्ट तारीख तय नहीं की गई है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त कर दी गई थी, जिसके परिणाम स्वरूप मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई की जांच के दौरान, 29 मई 2026 से गिरिबाला सिंह ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं और अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के निर्णय पर टिकी हैं।

निचली अदालत ने क्यों ठुकराई थी जमानत

भोपाल सत्र न्यायालय ने अपने आदेश में जमानत खारिज करने के पीछे ठोस कानूनी तर्क दिए थे। अदालत ने अपने अवलोकन में स्पष्ट किया था कि ट्विशा शर्मा की मृत्यु विवाह के उपरांत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी, जो कि एक अत्यंत गंभीर मामला है। अदालत ने केस डायरी के अलावा व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों का सूक्ष्म अध्ययन किया। सत्र न्यायालय ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि आरोपी गिरिबाला सिंह एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश रही हैं, जिसके कारण वह काफी प्रभावशाली स्थिति में हैं। न्यायालय ने यह आशंका जताई कि यदि उन्हें जमानत दी जाती है, तो वे मामले के साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास कर सकती हैं। अदालत ने यह भी साफ किया कि आरोपी की उम्र, उनके स्वास्थ्य की स्थिति और व्यक्तिगत पारिवारिक परिस्थितियां इस संगीन मामले में जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माने जा सकते।

मामले की पृष्ठभूमि और ट्विशा की मौत

यह पूरा घटनाक्रम 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में घटित हुआ था, जहां ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या का मामला बताया था, जबकि मृतका के परिजनों ने इसे हत्या का मामला करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। परिजन शुरू से ही भोपाल में हुई पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं थे। न्याय की आस में वे मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी मिले थे। तत्पश्चात हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और आदेश के बाद ट्विशा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया था। इस प्रक्रिया के बाद पुलिस ने समर्थ सिंह को हिरासत में लिया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बाद में जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया और उनके निवास स्थान पर घटनास्थल का पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रिक्रिएशन) भी किया। फिलहाल सीबीआई की जांच प्रक्रिया जारी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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