यूरोप में महंगाई का कहर: इटली और फ्रांस में भड़की हिंसा, प्रदर्शनकारियों की लूटपाट और आगजनी के बाद सैकड़ों गिरफ्तार विश्व 9 घंटे पहले 3
यूरोप के फ्रांस और इटली में बढ़ती महंगाई और युद्ध के विरोध में भड़की हिंसा के दौरान उग्र भीड़ ने दुकानों में लूटपाट की और गाड़ियों में आग लगा दी। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया है।

महंगाई और युद्ध के खिलाफ यूरोप में फूटा जनआक्रोश

यूरोप के कई हिस्सों में बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के बढ़ते खर्चों को लेकर आम जनता का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। फ्रांस और इटली जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है, जहां महंगाई के विरोध में शुरू हुए प्रदर्शनों ने हिंसक रूप धारण कर लिया। शनिवार को विभिन्न स्थानों पर शांतिपूर्ण तरीके से निकाले गए मार्च अचानक उपद्रव में बदल गए। प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में लूटपाट की और कई वाहनों व सार्वजनिक संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया। बिगड़ते हालातों को काबू में करने के लिए पुलिस को बड़े पैमाने पर आंसू गैस के गोले दागने पड़े और पानी की बौछार यानी वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ा। इस दौरान फ्रांस में करीब 272 लोगों की गिरफ्तारी हुई है, जबकि इटली के मिलान शहर में लगभग 50 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है।

मिलान में सड़कों पर संग्राम: लूटपाट और पुलिस पर पथराव

इटली के प्रमुख व्यावसायिक शहर मिलान में शनिवार को हिंसा की भयंकर तस्वीरें सामने आईं। शहर के मध्य भाग में एकत्रित हुए प्रदर्शनकारियों ने दंगा नियंत्रण पुलिस पर धावा बोल दिया। उपद्रवियों ने नकाबपोश बनकर सुरक्षाबलों पर पथराव किया और विभिन्न वस्तुओं से हमला कर दिया। इस हिंसक झड़प के दौरान काराबिनिएरी पुलिस की एक गाड़ी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई।

हिंसा के कारण मिलान के प्रसिद्ध पियाजा डेल डुओमो चौक और उसके आसपास स्थित महंगी दुकानों वाले बाजारों में भगदड़ मच गई। आम तौर पर ग्राहकों और पर्यटकों से गुलजार रहने वाले ये इलाके कुछ ही देर में पूरी तरह खाली हो गए। समाचार एजेंसी 'लाप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, उपद्रव के दौरान कम से कम 2 पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके अलावा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई नाबालिगों सहित करीब 50 प्रदर्शनकारियों को अपनी हिरासत में ले लिया है।

इटली की प्रधानमंत्री और मिलान के मेयर की कड़ी प्रतिक्रिया

मिलान में हुई इस व्यापक हिंसा पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना संदेश साझा करते हुए उपद्रवियों के कृत्य की जमकर आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि प्रदर्शन करना एक अधिकार है, लेकिन अपने शहरों में आग लगाना नहीं।

प्रधानमंत्री मेलोनी ने उन अराजक तत्वों पर निशाना साधा जो शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अराजकता फैलाते हैं, सुरक्षा सुनिश्चित करने वालों पर हमला करते हैं और पूरे शहरों को बंधक बना लेते हैं। वहीं दूसरी ओर, मिलान के मेयर ग्यूसेप्पे सेला ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि कानून लागू करने वाले सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हिंसा करना और शहर को भारी नुकसान पहुंचाना उचित नहीं है।

फ्रांस के पेरिस, ल्योन और मार्सिले में भारी तबाही

उधर फ्रांस में भी महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ जनआंदोलन उग्र रूप ले चुका है। राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारियों ने कई कारों को आग लगा दी और बाजारों में स्थित दुकानों में तोड़फोड़ कर सामान लूट लिया। नकाबपोश प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछारें कीं और आंसू गैस के गोले छोड़े। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरां नुनेज के कार्यालय से जारी बयान के अनुसार, देश के कई हिस्सों में पुलिसकर्मियों पर हमले, लूटपाट और सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं। देशभर से कम से कम 272 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

फ्रांस के कई अन्य बड़े शहरों से भी भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं:

  • ल्योन: यहां उपद्रवियों ने एक टूरिज्म दफ्तर के अंदर आगजनी की घटना को अंजाम दिया।
  • मार्सिले: इस शहर में दुकानों और नगरपालिका पुलिस स्टेशन को नुकसान पहुंचाया गया, जबकि कुछ प्रदर्शनकारी शहर के सिटी हॉल की लॉबी में भी घुस गए।
  • पेरिस: राजधानी की सड़कों पर गाड़ियों में आगजनी और दुकानों में लूटपाट दर्ज की गई।

2018 के 'येलो वेस्ट' आंदोलन की आहट

फ्रांस में जारी इस ताजा जनआक्रोश ने साल 2018 के बहुचर्चित 'येलो वेस्ट' आंदोलन की यादें ताजा कर दी हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शनकारी एक बार फिर उसी तर्ज पर एकजुट होने और इस आंदोलन को फिर से सक्रिय करने की अपील कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 के उस आंदोलन की शुरुआत भी सामाजिक असमानता और महंगाई के खिलाफ हुई थी। इस बार भी जनता में मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजों के दामों में हुई भारी बढ़ोतरी को लेकर गहरा गुस्सा देखा जा रहा है:

  • पेट्रोल और ईंधन की बढ़ती कीमतें
  • ऊर्जा और बिजली के दाम
  • खाद्य पदार्थों एवं दैनिक उपयोग की चीजों की महंगाई

यूरोप के इन दो बड़े देशों में फैली इस हिंसा ने आर्थिक संकट से जूझ रही जनता के गुस्से को उजागर कर दिया है। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार गश्त कर रही हैं।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप