बेटी के दिल में छेद, घर से निकाला गया, खाने को मोहताज... मां की दास्तां सुन भावुक हुए महापौर, उठाया बड़ा कदम मध्य प्रदेश एक महीने पहले 16
इंदौर में 40 दिन की बीमार बच्ची को गोद में लेकर पहुंची मां की पीड़ा सुनकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इलाज की पूरी जिम्मेदारी उठा ली और परिवार की आर्थिक मदद भी की।

कभी-कभी कोई घटना सिर्फ एक खबर नहीं रह जाती, बल्कि इंसानियत, दर्द और उम्मीद का ऐसा किस्सा बन जाती है जो लोगों की आंखें भिगो देती है। इंदौर में सामने आई एक तस्वीर ने ठीक यही किया। यहां महज 40 दिन की एक मासूम बच्ची को गोद में थामे उसकी मां मदद की उम्मीद लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव के पास जा पहुंची।

मां की आंखों में आंसू, गोद में बीमार बेटी

मां की आंखों में आंसू थे और गोद में उसकी बीमार बेटी। उस वक्त उस मां के मन में बस एक ही सवाल घूम रहा था कि आखिर अपनी नन्ही जान को कैसे बचाए। मां ने बताया कि उसकी बेटी के दिल में छेद है। सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने किसी बड़े अस्पताल में उपचार कराने की सलाह दी थी, मगर परिवार के पास इतने पैसे नहीं थे कि बच्ची का इलाज करा सके।

ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का आरोप

दर्द की यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। मां का आरोप है कि बेटी के जन्म के बाद ससुराल पक्ष उसे प्रताड़ित कर रहा है और उसे घर से निकाल दिया गया है। हालत यह है कि बच्ची के दूध और खाने तक के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। जब महिला ने अपने ससुरालियों की यह करतूत सुनाई तो सुनने वाले हैरान रह गए।

तुरंत चाइल्ड स्पेशलिस्ट को लगाया फोन

मां जब अपनी आपबीती सुना रही थी तो उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मासूम बच्ची भी लगातार रोए जा रही थी। यह दृश्य देखकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी भावुक हो उठे। उन्होंने तत्काल शहर के एक वरिष्ठ चाइल्ड स्पेशलिस्ट को फोन कर बच्ची के इलाज की व्यवस्था कराई और डॉक्टर से कहा कि उपचार में जो भी खर्च आएगा, उसकी फिक्र परिवार को न करनी पड़े।

महापौर ने बच्ची की मां को भरोसा दिलाया कि उसकी बेटी का बेहतर से बेहतर इलाज कराया जाएगा और उसे स्वस्थ करने की हरसंभव कोशिश की जाएगी।

एडीएम ने रखा था 'गौरी' नाम

महापौर ने परिवार की आर्थिक मदद की और उन्हें रहने की व्यवस्था का भी आश्वासन दिया। बताया जा रहा है कि इससे पहले बच्ची के माता-पिता कलेक्टर जनसुनवाई में भी पहुंचे थे, जहां एडीएम रोशन राय ने बच्ची का नाम 'गौरी' रखा था।

अब इस मासूम की जिंदगी बचाने की इस लड़ाई में प्रशासन और समाज, दोनों साथ खड़े नजर आ रहे हैं। संवेदनशीलता, करुणा और इंसानियत की यह तस्वीर सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। हर किसी की यही दुआ है कि नन्ही गौरी जल्द स्वस्थ हो और उसके जीवन में खुशियां लौट आएं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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