मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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इंदौर की सियासत में हलचल
मध्य प्रदेश के इंदौर में राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस के शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे से पुलिस द्वारा की गई लंबी पूछताछ ने शहर का राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण बना दिया है। मामला फरवरी महीने में हुए कांग्रेस कार्यालय पर पथराव से जुड़ा है, जिसमें पुलिस ने विवेचना के सिलसिले में चिंटू चौकसे को पंढरीनाथ थाने बुलाया था। यह पूछताछ कुल साढ़े 5 घंटे तक चली, जिसके बाद से कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
थाने के बाहर हुआ प्रदर्शन
जैसे ही चिंटू चौकसे के थाने में होने की सूचना मिली, कांग्रेस के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और नेता एकजुट होकर पंढरीनाथ थाने पहुंच गए। देखते ही देखते शाम तक थाना परिसर में डेढ़ सौ से अधिक समर्थक जमा हो गए और उन्होंने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं का वहां जुटना जारी रहा। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष सोनाली मिमरोट समेत अन्य पदाधिकारी थाने पहुंचे और एसीपी व थाना प्रभारी से मुलाकात कर चिंटू चौकसे को तत्काल रिहा करने की मांग की। आखिरकार रात करीब साढ़े आठ बजे अपना बयान दर्ज करवाने के बाद पुलिस ने चिंटू चौकसे को जाने दिया।
चौकसे ने लगाए राजनीतिक प्रताड़ना के आरोप
थाने से बाहर आने के बाद चिंटू चौकसे ने मीडिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें राजनीतिक दुर्भावना के चलते निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा के मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा किए गए आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण प्रशासन उन पर दबाव बना रहा है। चौकसे ने यह भी दावा किया कि उनके स्वास्थ्य को लेकर मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करने के बाद भी पुलिस ने उनके डॉक्टर तक को पूछताछ के लिए परेशान किया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि ऐसी कार्रवाई से कांग्रेस डरने वाली नहीं है और जनता के मुद्दों पर उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
सज्जन सिंह वर्मा का तीखा हमला
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने सरकार पर पुलिस के दुरुपयोग का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस का व्यवहार ऐसा है मानो कांग्रेस नेताओं ने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो। सज्जन सिंह वर्मा ने आगे कहा कि भाजपा सरकार पुलिस के जरिए विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है, जिसे पूरी दुनिया देख रही है। उन्होंने दावा किया कि वास्तव में हमला भाजपा के असामाजिक तत्वों ने किया था, जिसका कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केवल मुकाबला किया था। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि असल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज होना चाहिए था, लेकिन सरकार ने उल्टा कांग्रेसियों को ही थाने में बुलाना शुरू कर दिया।
पुलिस का क्या है कहना
पूरे मामले पर सफाई देते हुए पंढरीनाथ थाना क्षेत्र के एसीपी यश बिजोरिया ने बताया कि यह कार्रवाई किसी बदले की भावना से प्रेरित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फरवरी में दर्ज किए गए एक मामले की नियमित जांच प्रक्रिया के तहत ही चिंटू चौकसे को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था। एसीपी ने कहा कि कानून के अनुसार निष्पक्ष विवेचना करने के लिए नोटिस देकर बुलाया गया था। हमें उनका पक्ष जानना था ताकि जांच सही दिशा में आगे बढ़ सके और इसी वजह से पूछताछ की प्रक्रिया करीब पांच घंटे से अधिक समय तक चली है।
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