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3 घंटे पहले
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प्रतियोगिता के परिणाम और विजेताओं का सम्मान
उत्तर रेलवे की ओर से आयोजित ओएचई यानी ओवरहेड इक्विपमेंट स्किल एक्सीलेंस प्रतियोगिता 2026 के नतीजे घोषित कर दिए गए हैं। इस रोमांचक मुकाबले में अंबाला मण्डल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया है। वहीं, लखनऊ मण्डल प्रथम उपविजेता और दिल्ली मण्डल द्वितीय उपविजेता के रूप में उभरे हैं। गाजियाबाद स्थित इलेक्ट्रिक लोको शेड में आयोजित फाइनल समारोह के दौरान उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पाण्डेय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और विजयी मण्डलीय टीमों को ट्रॉफी व मेडल देकर सम्मानित किया।
प्रतियोगिता का उद्देश्य और कार्यप्रणाली
रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस प्रतियोगिता का आयोजन सितंबर 2026 में किया गया था, जिसमें उत्तर रेलवे के सभी 84 ओएचई डिपो ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस आयोजन का मूल उद्देश्य रेलवे के ओएचई अनुरक्षण और किसी भी संभावित ब्रेकडाउन के दौरान बहाली की प्रक्रिया में कर्मचारियों के कौशल को और अधिक निखारना था। प्रतियोगिता के दौरान विशेष रूप से उन तकनीकी कार्यों पर जोर दिया गया जो रेल परिचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसमें मुख्य रूप से कॉन्टैक्ट एवं कैटेनरी वायर स्प्लाइसिंग, ब्रैकेट व स्टे-आर्म इंसुलेटर रिप्लेसमेंट, तथा कैंटिलीवर एवं ATD रिप्लेसमेंट जैसी जटिल गतिविधियां शामिल थीं।
टीम वर्क और कौशल विकास पर जोर
उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने जानकारी दी कि यह पहल परिचालन सुरक्षा और तकनीकी उत्कृष्टता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से फ्रंटलाइन स्टाफ को न केवल अपने व्यावहारिक कौशल को बेहतर बनाने का मौका मिला, बल्कि इससे टीम भावना भी मजबूत हुई है। कर्मचारियों ने एक-दूसरे के कार्य करने के तरीकों को देखा और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करके नई तकनीकें सीखीं।
सुरक्षित रेल यात्रा के प्रति प्रतिबद्धता
रेलवे की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह प्रतियोगिता कर्मचारियों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षित और बिना किसी रुकावट के रेल यात्रा सुनिश्चित करने के संकल्प को दोहराती है। रेलवे ने उन सभी समर्पित कर्मचारियों को भी बधाई दी है, जो दिन-रात ट्रैक और ओएचई सिस्टम की देखरेख में जुटे रहते हैं। महाप्रबंधक राजेश कुमार पाण्डेय ने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए इसे तकनीकी क्षमता के निर्माण में एक मील का पत्थर बताया।
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