राष्ट्रीय राजनीति
3 घंटे पहले
2
विचारों
अगर आप अक्सर भारतीय रेलवे से यात्रा करते हैं, तो सफर के दौरान अपनी आदतों पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दीजिए। ट्रेन और रेलवे स्टेशनों पर प्लास्टिक की बोतलें छोड़ देना, खाने-पीने के खाली पैकेट सीट के नीचे डाल देना या गुटखा खाकर थूक देना अब आपकी जेब पर बहुत भारी पड़ने वाला है। भारतीय रेलवे ने देश के सभी स्टेशनों और ट्रेनों में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नियमों को पहले से कहीं अधिक सख्त कर दिया है। रेलवे प्रशासन ने गंदगी फैलाने वाले यात्रियों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई और जुर्माने की राशि में भारी बढ़ोतरी की है।
रेलवे की ओर से जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब गंदगी फैलाने पर लगने वाले जुर्माने को सीधे दोगुना कर दिया गया है। पहले जहां इन हरकतों के लिए अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना देना पड़ता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर सीधे 1,000 रुपये कर दिया गया है। रेलवे का यह नया नियम 24 अगस्त 2026 से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो गया है। इसी दिन इस संबंध में आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना भी प्रकाशित की जा चुकी है। इसलिए, अगली बार जब आप ट्रेन या प्लेटफॉर्म पर सफर कर रहे हों, तो कूड़ेदान का उपयोग करना बिल्कुल न भूलें।
लापरवाही पड़ेगी भारी: दोगुना हुआ जुर्माना
अक्सर देखा जाता है कि यात्री लंबी दूरी की यात्रा के दौरान खाने-पीने की चीजें खरीदते हैं और काम खत्म होने के बाद उनके खाली पैकेट, प्लास्टिक के कप या पानी की बोतलें वहीं अपनी सीट के नीचे या खिड़की के किनारे छोड़ देते हैं। कई लोगों को लगता है कि इतनी छोटी सी लापरवाही से क्या फर्क पड़ता है और सफाई कर्मचारी इसे साफ कर ही देंगे। लेकिन अब रेलवे प्रशासन ने इस तरह की गैर-जिम्मेदार हरकतों पर पूरी तरह से नकेल कसने की तैयारी कर ली है।
नए प्रावधानों के तहत सफाई से जुड़े किसी भी नियम का उल्लंघन करने पर यात्रियों को तत्काल भारी-भरकम जुर्माना भरना पड़ सकता है। सरकार और रेलवे का उद्देश्य ट्रेनों और स्टेशनों को पूरी तरह साफ-सुथरा बनाना है, जिसके लिए यात्रियों की भागीदारी और उनकी जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी समझा गया है।
अदालत पहुंचने पर लगेगा और अधिक जुर्माना
रेलवे के नए स्वच्छता नियमों के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया को भी बहुत स्पष्ट और कड़ा बनाया गया है। यदि कोई यात्री ट्रेन या रेलवे परिसर में गंदगी फैलाते हुए पकड़ा जाता है, तो मौके पर मौजूद रेलवे का अधिकृत अधिकारी उस पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाएगा। यदि यात्री उस समय मौके पर जुर्माना भरने से साफ इनकार कर देता है या किसी प्रकार का विवाद खड़ा करता है, तो मामला केवल वहीं खत्म नहीं होगा।
ऐसी स्थिति में रेलवे अधिकारी मामले को सक्षम अदालत के समक्ष भेज सकते हैं। यदि मामला अदालत में जाता है और यात्री दोषी पाया जाता है, तो उस पर लगने वाले जुर्माने की राशि बढ़कर सीधे 2,000 रुपये तक हो सकती है। इसलिए लापरवाही का रवैया या अधिकारियों से बहस करना अब यात्रियों के लिए कानूनी पचड़े और बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
किन-किन हरकतों पर होगी कार्रवाई?
रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि जुर्माना केवल प्लास्टिक या कागज फेंकने तक ही सीमित नहीं है। स्वच्छता को प्रभावित करने वाली कई अन्य गतिविधियों को भी इस कड़े दायरे में शामिल किया गया है। रेलवे स्टेशनों, प्लेटफॉर्मों, रेल पटरियों या ट्रेन के डिब्बों में निम्नलिखित कार्य करना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है:
- कचरा फैलाना: भोजन के बचे हुए पैकेट, खाली बोतलें, डिब्बे, कागज, प्लास्टिक बैग या किसी भी अन्य प्रकार का कूड़ा-कचरा केवल निर्धारित कूड़ेदानों में ही फेंकना होगा। इन्हें सीट के नीचे या खुले में फेंकना अपराध माना जाएगा।
- थूकना: प्लेटफॉर्म, सीढ़ियों, फुटओवर ब्रिज या ट्रेन के कोच के अंदर थूकना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
- अवैध रूप से खाना पकाना या नहाना: रेलवे स्टेशन या उसके आसपास के परिसर में जहां उचित और स्वीकृत व्यवस्था न हो, वहां खाना पकाना या स्नान करना पूरी तरह से वर्जित है।
- शौच या पेशाब करना: रेलवे ट्रैक, प्लेटफॉर्म के किनारों या स्टेशन परिसर में खुले में शौच या पेशाब करते पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई होगी।
- जानवरों को खिलाना: रेलवे परिसर में बिना अनुमति के आवारा जानवरों या पक्षियों को भोजन खिलाने पर भी रोक लगाई गई है।
- धुलाई कार्य: स्टेशन परिसर या ट्रेनों के वाशबेसिन के पास अपने निजी वाहन, कपड़े या बर्तन धोना भी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर भी शिकंजा
इसके अलावा, रेलवे की संपत्तियों को खराब करने की आदत पर भी रोक लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कई लोग रेलवे स्टेशनों की दीवारों, ट्रेनों के कोचों की सीट के पीछे या शौचालय की दीवारों पर पेन, कोयले या किसी अन्य चीज से लिखते हैं या चित्र बना देते हैं। नए नियमों के अनुसार, रेलवे की संपत्ति पर बिना पूर्व अनुमति के कोई भी पोस्टर चिपकाना, कुछ भी लिखना या चित्रकारी करना गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आएगा और इस पर भी समान रूप से जुर्माना लगाया जाएगा।
कार्रवाई करने का अधिकार किसे मिला है?
यात्रियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यह जुर्माना वसूलने और कार्रवाई करने का अधिकार किन अधिकारियों के पास होगा। रेलवे प्रशासन ने इस कार्य के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों को अधिकृत किया है:
- स्टेशन मास्टर और स्टेशन मैनेजर: स्टेशन परिसर के भीतर स्वच्छता बनाए रखने और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने की मुख्य जिम्मेदारी इनकी होगी।
- टिकट चेकिंग स्टाफ: कमर्शियल विभाग के टिकट कलेक्टर और मुख्य टिकट निरीक्षक ट्रेनों के भीतर और प्लेटफॉर्म पर यात्रियों पर नजर रखेंगे।
- ऑपरेटिंग विभाग के अधिकारी: ऑपरेटिंग विभाग के समकक्ष स्तर के अधिकारियों को भी जुर्माना लगाने की शक्तियां दी गई हैं।
- रेलवे द्वारा अधिकृत अन्य अधिकारी: रेलवे प्रशासन द्वारा विशेष रूप से नामित किए गए अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों को भी उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ चालान काटने का अधिकार होगा।
फेरीवालों और वेंडर्स के लिए भी तय हुई जिम्मेदारी
रेलवे ने सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए केवल यात्रियों पर ही जिम्मेदारी नहीं डाली है, बल्कि स्टेशनों और ट्रेनों में सामान बेचने वाले लाइसेंस प्राप्त वेंडर्स, दुकानदारों और फेरीवालों के लिए भी कड़े नियम तय किए हैं। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी अधिकृत वेंडर्स और फेरीवालों को अपनी दुकान या ठेले के पास कचरा एकत्र करने के लिए अनिवार्य रूप से डस्टबिन या उपयुक्त कचरा पात्र रखना होगा। इसके साथ ही उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनकी दुकान से निकलने वाला सारा कचरा सही तरीके से और रेलवे द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार ही निपटाया जाए। यदि कोई वेंडर इन नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके खिलाफ भी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
क्या सचमुच हो सकती है जेल? नियमों की सच्चाई
सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर नए नियमों को लेकर कई तरह की बातें चल रही हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि कचरा फेंकने पर सीधे जेल की सजा हो सकती है। इस विषय पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होना आवश्यक है। स्वच्छता नियमों के सीधे उल्लंघन के लिए प्राथमिक सजा 1,000 रुपये का जुर्माना ही है। यदि अपराधी जुर्माना नहीं भरता है, तो मामला अदालत जाता है जहां 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
हालांकि, यदि कोई व्यक्ति रेलवे की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचाता है, अधिकारियों के काम में बाधा डालता है या रेलवे के अन्य गंभीर अपराधों (जैसे रेलवे अधिनियम की अन्य धाराओं के तहत) में संलिप्त पाया जाता है, तो उन विशिष्ट परिस्थितियों में जेल की सजा का प्रावधान पहले से मौजूद है। केवल साधारण कचरा फेंकने के मामले में सीधे जेल नहीं होती, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं और अदालती कार्रवाइयों से बचने के लिए यात्रियों को सदैव जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करना चाहिए। रेलवे की इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यात्रियों को डराना नहीं, बल्कि लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना है ताकि भारतीय रेल का सफर सभी के लिए सुखद और स्वच्छ बन सके।
Comments
0 comment