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4 घंटे पहले
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प्रीमियम ट्रेनों की तस्वीर बदलेगा रेलवे का नया प्लान
भारतीय रेलवे लगातार अपने यात्रियों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्रयासरत रहता है। रेल यात्रा के अनुभव को सुखद बनाने के लिए रेलवे ने वर्षों से कई बड़े कदम उठाए हैं, लेकिन बावजूद तमाम कोशिशों के, ट्रेनों में सफाई बनाए रखना अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेष रूप से प्रीमियम ट्रेनों के अंदर जमा होने वाला कचरा यात्रियों के लिए असुविधा का कारण बनता है। अब इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए भारतीय रेलवे ने एक महत्वपूर्ण योजना को आकार दिया है, जिससे ट्रेनों के भीतर 5 स्टार होटल जैसी स्वच्छता और अनुभव सुनिश्चित हो सकेगा।
LHB कोच की पुरानी समस्या का समाधान
रेलवे ने अधिकांश लंबी दूरी की ट्रेनों में आधुनिक LHB कोच यानी लिंक हाफमैन बुश कोच लगाकर तकनीकी स्तर पर काफी सुधार किया है। हालांकि, इन कोचों के साथ एक पुरानी तकनीकी दिक्कत यह रही है कि इनमें लगे कूड़ेदानों की क्षमता बहुत सीमित है। लंबी दूरी की ट्रेनों में जैसे ही डस्टबिन भर जाते हैं, कोच के अंदर गंदगी फैलने लगती है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए झांसी स्थित वैगन रिपेयर वर्कशॉप ने एक हाई-कैपेसिटी कचरा संग्रह प्रणाली का सफल प्रोटोटाइप तैयार किया है।
साढ़े तीन सौ लीटर से अधिक की क्षमता
वर्तमान में LHB कोचों में लगे कचरा पात्रों की क्षमता मात्र 18 लीटर तक होती है, जो यात्रियों की संख्या को देखते हुए बहुत कम पड़ जाती है। नई विकसित प्रणाली के तहत अब कचरा संग्रह करने की क्षमता को बढ़ाकर 367.4 लीटर कर दिया जाएगा। यह मौजूदा क्षमता के मुकाबले लगभग 20.4 गुना की भारी वृद्धि है। इस बदलाव से सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि सफाई कर्मचारियों को बार-बार कचरा हटाने के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी और कचरा टैंक को ट्रेन के रखरखाव के दौरान ही खाली करना पर्याप्त होगा।
गुरुत्वाकर्षण बल का अनोखा उपयोग
इस नई व्यवस्था की तकनीक को काफी सरल और प्रभावी रखा गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए कोच के फर्श पर एक कूड़ादान लगाया जाएगा जो सीधे उनके उपयोग के लिए होगा। कचरा एक सेंट्रल कनेक्टर के जरिए नीचे लगे स्टील बॉक्स और फिर वहां से मुख्य संग्रह टैंक तक पहुंचेगा। इस पूरी प्रक्रिया में ग्रैविटेशनल फोर्स यानी गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग किया गया है, जिससे किसी अतिरिक्त मशीन या बिजली की खपत की आवश्यकता नहीं होगी। यह पूरी तरह से एक स्व-संचालित प्रक्रिया होगी जो कोच की सफाई बनाए रखने में सहायक साबित होगी।
डीडीयू जंक्शन बनेगा मॉडल
इस नई योजना की शुरुआत उत्तर प्रदेश के पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से करने की तैयारी है। इस जंक्शन का महत्व इसलिए अधिक है क्योंकि यहां से प्रतिदिन लगभग 100 यात्री ट्रेनें गुजरती हैं, जिनसे रोजाना करीब 3 टन कचरा निकलता है। इस जंक्शन पर कचरा प्रबंधन की चुनौती को देखते हुए यह प्रयोग यहां सबसे पहले किया जा रहा है।
किन ट्रेनों को मिलेगा फायदा
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से गुजरने वाली प्रमुख प्रीमियम ट्रेनों में यह व्यवस्था सबसे पहले लागू की जाएगी। इसमें राजधानी एक्सप्रेस, दुरंतो एक्सप्रेस, वंदे भारत, नेताजी एक्सप्रेस, विभूति एक्सप्रेस और हिमगिरी जैसी हाई-प्रोफाइल ट्रेनें शामिल हैं। एक बार मंजूरी मिलने के बाद, इन सभी रूटों पर चलने वाली ट्रेनों के यात्रियों को यात्रा के दौरान गंदगी से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी और उन्हें एक बेहतर, स्वच्छ और प्रीमियम वातावरण का एहसास होगा। रेलवे का यह नवाचार निश्चित रूप से भारतीय रेल यात्रा की दिशा में एक बड़ा सकारात्मक कदम साबित होगा।
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