भारत
42 मिनट पहले
3
विचारों
भारतीय रक्षा तंत्र में जैवलिन की एंट्री
अपनी सैन्य क्षमताओं को नई ऊंचाई देने की दिशा में भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भारत अब अमेरिका से अत्यधिक उन्नत जैवलिन मिसाइल सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है। इस सौदे की औपचारिक पुष्टि भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर द्वारा की गई है। इस समझौते को भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को नई मजबूती प्रदान करने वाला एक ऐतिहासिक पड़ाव माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय सेना की मारक क्षमता में भारी वृद्धि करेगा।
क्या है जैवलिन मिसाइल सिस्टम की ताकत
जैवलिन एक अत्याधुनिक 'फायर-एंड-फॉरगेट' एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है, जो अपनी सटीकता के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। इस मिसाइल का निर्माण अमेरिकी रक्षा कंपनी लॉकहीड मार्टिन द्वारा किया जाता है। इसकी मुख्य विशेषताओं में शामिल हैं:
- यह एक मीडियम रेंज की मिसाइल है जिसे बख्तरबंद वाहनों और मजबूत बंकरों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है।
- यह सिस्टम थर्मल गाइडेंस और हाई मोबिलिटी से लैस है, जो इसे युद्ध के मैदान में बेहद घातक बनाता है।
- अपनी पोर्टेबिलिटी के कारण इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना और तैनात करना बहुत आसान है।
- अमेरिकी सेना और अमेरिकी मरीन कॉर्प्स सहित दुनिया के कई बड़े देश पहले से ही इस हथियार का उपयोग कर रहे हैं।
रक्षा क्षमताओं में होगा इजाफा
जैवलिन मिसाइल का भारतीय सेना में शामिल होना इन्फैंट्री की एंटी-आर्मर क्षमता को एक नई दिशा देगा। साल 2025 के आखिर में अमेरिका ने जैवलिन मिसाइल सिस्टम की बिक्री भारत को करने के लिए मंजूरी दे दी थी। इस मिसाइल के आने से भारतीय सेना न केवल सीमा पर और अधिक चौकन्नी रहेगी, बल्कि आधुनिक युद्ध शैली में तीव्र और सटीक हमला करने की क्षमता भी हासिल कर सकेगी। यह हथियारों की तकनीक में भारत के आधुनिकीकरण के एजेंडे का एक प्रमुख हिस्सा है।
क्या बोले अमेरिकी राजदूत
इस महत्वपूर्ण समझौते पर चर्चा करते हुए भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने अपना उत्साह व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा जंग में परखे गए जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम को खरीदना भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम है। उन्होंने आगे कहा कि जैसा कि युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने मई 2026 के शांगरी-ला डायलॉग में स्पष्ट किया था, यह समझौता भविष्य में साथ मिलकर उत्पादन करने की संभावनाओं के द्वार भी खोलेगा। वर्तमान में दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है।
Comments
0 comment