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5 घंटे पहले
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वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को दूर करने के लिए भारत और चीन एक बार फिर आमने-सामने बैठने जा रहे हैं। इस बार यह बैठक बेहद खास होने वाली है क्योंकि इतिहास में पहली बार अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पूर्वी सेक्टर (ईस्टर्न सेक्टर) में कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ता आयोजित की जा रही है। दोनों देशों के सैन्य प्रतिनिधियों के बीच होने वाली यह महत्वपूर्ण बैठक रविवार को वाचा-दमाई सीमा बैठक स्थल पर आयोजित की जाएगी।
तनाव कम करने के लिए अहम बैठक
यह सैन्य वार्ता ऐसे संवेदनशील समय में आयोजित की जा रही है जब अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र में भारत और चीनी सैनिकों के बीच तनाव बढ़ने की खबरें हाल ही में सामने आई थीं। ऐसी परिस्थितियों में दोनों देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों का एक साथ बैठना सीमा पर शांति स्थापित करने और दोनों पक्षों के बीच तनाव को कम करने के उपायों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया
इस उच्च स्तरीय वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया करेंगे। लेफ्टिनेंट जनरल कालिया भारतीय सेना की प्रसिद्ध 3 Corps (स्पीयर कॉर्प्स) के कमांडर हैं। इस सैन्य कोर का मुख्यालय नागालैंड के रंगापहार में स्थित है। यह कोर सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालती है, क्योंकि इसके पास अरुणाचल प्रदेश के मध्य और पूर्वी हिस्सों से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के ऑपरेशनल क्षेत्रों की सुरक्षा और निगरानी का पूरा जिम्मा है।
चीन हमारे लिए दीर्घकालिक और बड़ी चुनौती: पूर्व सीडीएस अनिल चौहान
इस बीच, देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भारत और चीन के संबंधों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने चीन को भारत के समक्ष मौजूद सुरक्षा चुनौतियों में सबसे बड़ी और दीर्घकालिक चुनौती करार दिया है। जनरल चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े विवाद अभी तक पूरी तरह से सुलझाए नहीं जा सके हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की सटीक स्थिति को लेकर दोनों पक्षों के बीच अब तक कोई साझा और सर्वसम्मत दृष्टिकोण नहीं बन पाया है। हालांकि, उनका मानना है कि भारत-चीन संबंधों को केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
सहयोग और प्रतिस्पर्धा का संतुलन
शनिवार को तीन मूर्ति भवन परिसर में "भारत की सुरक्षा के लिए खतरे और चुनौतियां" विषय पर आयोजित एक व्याख्यान को संबोधित करते हुए पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने अपनी बातें विस्तार से रखीं। उन्होंने कहा कि चीन भारत के लिए एक बेहद जटिल और अलग प्रकार की चुनौती पेश करता है जो लंबे समय तक चलने वाली है। दोनों देश एशिया की दो प्रमुख शक्तियां, बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्राचीन सभ्यताओं वाले देश हैं। ऐसे में दोनों देशों के संबंधों को केवल सीमा विवाद के नजरिए से देखना उचित नहीं होगा।
उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश वैश्विक और क्षेत्रीय मंचों पर एक-दूसरे के साथ सहयोग भी करते हैं और कई मोर्चों पर दोनों के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा भी है। इसके अलावा, क्षेत्रीय और वैश्विक व्यवस्था को लेकर दोनों देशों के दृष्टिकोण में काफी अंतर है। ऐसी स्थिति में चीन के साथ निरंतर संवाद और संपर्क बनाए रखना बेहद आवश्यक है। पूर्व सीडीएस ने सीमा पर स्थिरता बनाए रखने के लिए कुछ मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया:
- सीमा पर हर समय कड़ी सतर्कता बनाए रखना।
- भरोसेमंद और मजबूत सैन्य क्षमताओं का विकास करना।
- स्पष्ट समझौते करना और उनका लगातार और कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना।
उन्होंने अंत में कहा कि सीमा विवाद के स्थायी समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के साथ-साथ दोनों देशों के बीच आपसी संवाद की प्रक्रिया भी लगातार जारी रहनी चाहिए।
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