राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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भारत और अर्जेंटीना के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों के एक नए युग की शुरुआत हुई है। ब्यूनस आयर्स में आयोजित भारत और अर्जेंटीना संयुक्त व्यापार समिति की चौथी बैठक के दौरान द्विपक्षीय सहयोग को एक नई दिशा दी गई है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में हुई इस बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और खनन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया। वर्तमान में दोनों देशों के बीच का द्विपक्षीय व्यापार 6.5 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछली यात्रा के दौरान तैयार किए गए रोडमैप की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
लिथियम खनन में भारत को मिली बड़ी कामयाबी
इस साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा लिथियम खनन से जुड़ा है। भारत की सरकारी कंपनी खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड (काबिल) ने अर्जेंटीना के कैटामार्का प्रांत में लिथियम की खोज के लिए दूसरे चरण की ड्रिलिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। लैटिन अमेरिकी क्षेत्र में किसी भारतीय कंपनी द्वारा संचालित यह पहली इतनी बड़ी और महत्वपूर्ण लिथियम परियोजना है। इस सफलता के बाद अब भारत ने अर्जेंटीना के साल्टा और जुजुय प्रांतों में भी नए लिथियम भंडार खोजने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
लिथियम को आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में 'सफेद सोना' माना जाता है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते बाजार और एडवांस बैटरी मैन्युफैक्चरिंग उद्योग के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इस परियोजना के पूरी तरह सक्रिय होने से भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी और देश के भीतर ही सस्ती बैटरियों का निर्माण संभव हो सकेगा।
भारतीय फार्मा और कृषि निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
इस बैठक में खनिज के साथ-साथ स्वास्थ्य और कृषि व्यापार पर भी विस्तार से चर्चा हुई। भारतीय दवा (फार्मा) कंपनियों को अर्जेंटीना के बाजारों में सुगम प्रवेश की अनुमति दी जाएगी, जिससे भारतीय फार्मा उत्पादों का लैटिन अमेरिका में निर्यात काफी बढ़ जाएगा। इसके अलावा, कृषि क्षेत्र में व्यापार को आसान बनाने के लिए सैनिटरी एंड फाइटोसैनिटरी (SPS) वार्ता भी शुरू की गई है, जिससे दोनों देशों के बाजारों में कृषि उत्पादों का आयात-निर्यात सुगम हो सकेगा।
दोनों देशों ने खनन, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्रों में भारी निवेश को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह रणनीतिक गठजोड़ न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को ताकत देगा, बल्कि वैश्विक लिथियम बाजार में चीन के बढ़ते एकाधिकार को भी सीधी चुनौती देगा।
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