रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए भारत ने तेज की कूटनीति, जयशंकर ने पुतिन और जेलेंस्की को दिया सीधा संदेश राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 6
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे लंबे संघर्ष को समाप्त करने के लिए भारत की सक्रियता बढ़ गई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत दोनों देशों के साथ संपर्क में है और युद्धविराम के लिए समाधान की तलाश कर रहा है।

रूस-यूक्रेन संघर्ष में भारत की सक्रिय भूमिका

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा विनाशकारी युद्ध अब अपने पांचवें वर्ष में पहुंच चुका है। लंबे समय तक शांति की अपील करने वाला भारत अब इस संघर्ष को सुलझाने के लिए एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका में आ गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 4 अक्टूबर को स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत इस युद्ध को खत्म करने के लिए पर्दे के पीछे और मुख्य मंच पर दोनों ही स्तरों पर ठोस काम कर रहा है।

बातचीत से समाधान की कवायद

विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि भारत दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए है। भारत का एकमात्र लक्ष्य इस खूनी संघर्ष को समाप्त कर बातचीत की मेज पर स्थायी शांति का रास्ता तैयार करना है। जयशंकर के अनुसार, भारत ने रूस और यूक्रेन को सीधे बातचीत करने की नसीहत दी है। इस बातचीत के एजेंडे में युद्ध रोकने के साथ-साथ एक-दूसरे के खिलाफ हमलों को पूरी तरह से बंद करने की संभावनाएं भी शामिल हैं।

ब्लैक सी और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा

युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर फैली अस्थिरता को देखते हुए भारत अब ब्लैक सी (काला सागर) के रास्ते जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर भी गंभीर है। जयशंकर ने बताया कि अनाज और ऊर्जा के निर्यात को लेकर भी दोनों पक्षों के साथ चर्चा चल रही है। भारत का मानना है कि युद्ध को अनिश्चित काल तक खींचने के बजाय युद्धविराम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि बुनियादी ढांचे और मानवीय जीवन को और अधिक नुकसान न हो। अब तक इस युद्ध में हजारों नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है और लाखों लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं।

यूक्रेन का रुख और भारत का प्रस्ताव

भारत की शांति कोशिशों को उस समय बड़ी सफलता मिली जब यूक्रेन ने भारत के प्रस्ताव का खुलकर स्वागत किया। 2 अक्टूबर को यूक्रेन ने रूस के साथ संभावित युद्धविराम के लिए भारत द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव को अब तक का सबसे व्यापक और प्रभावी विकल्प माना है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने मीडिया से बातचीत में स्वीकार किया कि कीव के पास वर्तमान में चार अलग-अलग शांति प्रस्ताव हैं, जिनमें भारत का प्रस्ताव सबसे अधिक व्यावहारिक है।

शांति वार्ता की शर्तें

यूक्रेन का कहना है कि वे ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और ब्लैक सी में आवाजाही को लेकर युद्धविराम के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, उनकी शर्त यह है कि इन प्रस्तावों को एक साथ और समग्र रूप से लागू किया जाना चाहिए। भारतीय कूटनीति अब इसी दिशा में काम कर रही है कि किस प्रकार रूस और यूक्रेन को एक साझा सहमति पर लाया जा सके। भारत की यह सक्रियता वैश्विक मंच पर नई दिल्ली के बढ़ते प्रभाव और संघर्ष निवारण में उसकी क्षमता को दर्शाती है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भारत की यह पहल दोनों देशों को शांति के करीब ला पाएगी।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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