ट्रैफिक चालान न भरने पर अब घर की बिजली गुल? सुप्रीम कोर्ट ने दिए सख्ती के संकेत राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 4
सुप्रीम कोर्ट ने पेंडिंग ई-चालान की भारी भरकम राशि की वसूली के लिए राज्यों को कड़े कदम उठाने का सुझाव दिया है, जिसमें बिजली बिल से चालान जोड़ना और लाइसेंस रद्द करना शामिल है।

ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

सड़क पर गाड़ी चलाते वक्त अब थोड़ी सी लापरवाही आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। अगर आप ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करते हैं और उन पर लगने वाले ई-चालान को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। देश की सर्वोच्च अदालत ने लंबित ट्रैफिक चालानों की वसूली को लेकर एक ऐसी सलाह दी है जो वाहन चालकों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुझाव दिया है कि पेंडिंग ई-चालान को सीधा बिजली के बिल के साथ जोड़ दिया जाए। यदि यह सुझाव पूरी तरह लागू होता है, तो ट्रैफिक जुर्माना न भरने पर आपके घर की बिजली भी काटी जा सकती है।

45,000 करोड़ रुपये का बकाया है बोझ

यह पूरा मामला जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ के सामने उठा। अदालत एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जो इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक उल्लंघन और उनसे जुड़े लंबित जुर्माने की वसूली के इर्द-गिर्द केंद्रित थी। सुनवाई के दौरान अदालत को जो आंकड़े पेश किए गए, वे काफी हैरान करने वाले हैं। कोर्ट को बताया गया कि देशभर में वर्तमान में करीब 45,000 करोड़ रुपये के ई-चालान बकाया हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, जितनी बड़ी राशि जुर्माना के रूप में लंबित है, उसके मुकाबले वसूली बेहद कम है। अभी तक महज 25,000 करोड़ रुपये ही सरकारी खजाने में जमा हो पाए हैं। इस भारी-भरकम अंतर को पाटने के लिए ही अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।

बिजली कटौती से लेकर लाइसेंस निलंबन तक के उपाय

सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने स्पष्ट किया कि पेंडिंग चालान को वसूलने के लिए अधिकारियों को सख्त से सख्त कदम उठाने चाहिए। अदालत द्वारा सुझाए गए प्रमुख उपायों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • लंबे समय तक जुर्माना न भरने वालों के बिजली कनेक्शन काटने पर विचार किया जाए।
  • रैंडम व्हीकल चेकिंग के दौरान पुराने लंबित चालान वाली गाड़ियों को मौके पर ही जब्त किया जाए।
  • जब तक बकाया जुर्माना जमा नहीं होता, तब तक संबंधित व्यक्ति का ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड रखा जाए।
  • गाड़ी के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) के नवीनीकरण पर रोक लगाई जाए।
  • वाहनों के फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण (PUC) सर्टिफिकेट जारी करने से मना कर दिया जाए।
  • परिवहन पोर्टल पर उन सभी गाड़ियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए जिनके ऊपर जुर्माना बकाया है।
  • डुप्लीकेट आरसी बनवाने या वाहन के मालिकाना हक को ट्रांसफर करने जैसी सेवाओं पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाए।

अभी केवल सुझाव, भविष्य में कड़े नियमों की तैयारी

हालांकि, यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अदालत द्वारा सुझाए गए ये उपाय फिलहाल चर्चा के चरण में हैं। ये कोई अंतिम निर्देश या कानून नहीं हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह रुख यह दर्शाता है कि भविष्य में सरकारें और ट्रैफिक विभाग वसूली के लिए बेहद सख्त नीति अपना सकते हैं। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य वाहन चालकों के मन में ट्रैफिक नियमों के प्रति डर पैदा करना और व्यवस्था में सुधार लाना है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकारें इस सुझाव पर किस तरह से प्रतिक्रिया देती हैं और इसे धरातल पर उतारने के लिए क्या नया तंत्र विकसित किया जाता है। फिलहाल, वाहन मालिकों के लिए यही सलाह है कि अपने ई-चालान का समय पर भुगतान करें, अन्यथा मामूली सी गलती का हर्जाना उन्हें भारी पड़ सकता है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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