एल नीनो 2026: धरती पर मंडरा रहा सदी का सबसे बड़ा संकट, भारत के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें राष्ट्रीय राजनीति 2 घंटे पहले 3
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल 2026 में आने वाला एल नीनो पिछले 100 वर्षों में सबसे घातक हो सकता है, जिससे दुनिया भर के तापमान और भारत की कृषि व्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा।

सदी के सबसे भीषण संकट की आहट

धरती पर एक बार फिर से भयंकर गर्मी का दौर आने वाला है. विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2026 में दस्तक देने वाला एल नीनो पिछली 100 साल की सभी रिकॉर्ड तोड़ सकता है. यह अब तक का सबसे शक्तिशाली प्रभाव साबित हो सकता है, जिससे पूरी दुनिया का मौसम चक्र बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है.

प्रशांत महासागर का बढ़ता तापमान

वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार, प्रशांत महासागर के तापमान में 3 डिग्री सेल्सियस से अधिक की बढ़ोतरी होने की संभावना है. यह तापमान में असामान्य उछाल वैश्विक स्तर पर मौसम की स्थिति को बिगाड़ सकता है. आशंका जताई जा रही है कि इस स्थिति के चलते साल 2027 इतिहास का सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया जा सकता है.

भारत के लिए दोहरी चुनौती

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे गंभीर असर भारत पर पड़ने की आशंका है. देश के लिए यह संकट दो मोर्चों पर एक साथ सामने आ सकता है:

  • मानसून पर मार: एल नीनो के कारण भारत में मानसून कमजोर रह सकता है, जिससे बारिश की कमी से जूझना पड़ सकता है.
  • खेती और फसल का नुकसान: देश में रबी की फसल और आने वाली अगली फसलों की पैदावार पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है.

कुल मिलाकर, एल नीनो न केवल देश के तापमान को बढ़ाएगा, बल्कि कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से भी बड़ी चुनौती पेश कर सकता है.

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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