दिल्ली
एक महीने पहले
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विचारों
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठे लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, अस्पताल में भी उनका अनशन लगातार जारी है और आज उनकी भूख हड़ताल का 22वां दिन है। उन्होंने अस्पताल में किसी भी तरह की ड्रिप, ORS या दवाइयां लेने से पूरी तरह मना कर दिया है। इस बीच, उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक आपातकालीन याचिका दायर कर उन्हें किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी है। दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन भी जारी है। प्रदर्शनकारियों ने 20 मार्च को संसद भवन तक मार्च करने की योजना बनाई है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसके लिए अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है।
कैसी है सोनम वांगचुक की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति?
VMMC और सफदरजंग अस्पताल द्वारा रविवार सुबह जारी किए गए ताजा मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, सोनम वांगचुक का आवश्यक उपचार किया जा रहा है। हालांकि उनके शरीर के महत्वपूर्ण संकेत (वाइटल साइन) अभी स्थिर बताए गए हैं, लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि उनके रक्त के मापदंडों (ब्लड पैरामीटर) में मामूली बदलाव देखा गया है। डॉक्टरों की टीम ने चेतावनी दी है कि इतने लंबे समय तक उपवास रखने के कारण उनके शरीर पर अत्यधिक तनाव और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए, उन्हें विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक (मल्टी-डिसिप्लिनरी) टीम की सतत निगरानी और कड़ी चिकित्सकीय देखरेख में रखा जाएगा।
इससे पहले शनिवार की रात को अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी एक बयान में बताया गया था कि वांगचुक पूरी तरह होश में हैं और उनकी हीमोडायनामिक स्थिति नियंत्रण में है। उनकी नाड़ी की गति (पल्स), ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन सैचुरेशन सामान्य सीमा के भीतर पाए गए थे। इसके बावजूद, डॉक्टरों ने उनके लंबे समय से जारी अनशन के दीर्घकालिक प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और कहा है कि अब उन्हें समय पर उचित चिकित्सकीय सहायता दिए जाने की आवश्यकता है।
पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने खटखटाया दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा
अपने पति के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित गीतांजलि जे. आंग्मो ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से हटाकर उनके मनपसंद के किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मंजूरी दी जाए। गीतांजलि इस याचिका पर रविवार को ही तत्काल सुनवाई करने की मांग कर रही हैं। सरकारी अस्पताल के प्रशासन से अपना भरोसा उठने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि वह एक्टिविस्ट की सेहत को और अधिक गंभीर होने से बचाना चाहती हैं, इसलिए उन्हें तुरंत किसी निजी अस्पताल में ले जाना बेहद जरूरी है।
हाई कोर्ट में दायर अपनी याचिका में गीतांजलि ने आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद सफदरजंग अस्पताल के अधिकारियों ने उन्हें केवल चुनिंदा और सीमित जानकारियां ही प्रदान की हैं। अस्पताल प्रशासन ने वांगचुक को किसी अन्य अस्पताल में शिफ्ट करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है, जिसके कारण उनके स्वास्थ्य की किसी स्वतंत्र चिकित्सा दल से जांच कराना संभव नहीं हो पा रहा है।
अपने पति की सेहत को लेकर गहरी चिंता प्रकट करते हुए गीतांजलि ने कहा कि वह इलाज के इस "गुप्त और पूरी तरह से अपारदर्शी तरीके" से अत्यंत duखी हैं। उन्होंने दावा किया कि जब उनके पति को जंतर-मंतर स्थित विरोध स्थल से हटाया जा रहा था, तब उनके सभी आवश्यक मेडिकल पैरामीटर पूरी तरह स्थिर थे। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा 16 जुलाई को दिया गया आदेश, जिसमें अधिकारियों को वांगचुक की सेहत पर नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए गए थे, वह एकतरफा था। शनिवार को दिल्ली पुलिस ने बिना किसी वास्तविक मेडिकल इमरजेंसी के उस आदेश का अनुचित लाभ उठाया और अनशन कर रहे एक्टिविस्ट को जबरन वहां से हटा दिया।
गीतांजलि ने अस्पताल को बताया 'गैर-कानूनी हिरासत' का केंद्र
अपने X हैंडल पर साझा की गई एक पोस्ट में गीतांजलि ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी परिवार को अपने परिजन के लिए सही चिकित्सा संस्थान का चयन करने जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी व्यवस्था से इस कदर संघर्ष नहीं करना पड़ना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सफदरजंग अस्पताल द्वारा जारी सार्वजनिक स्वास्थ्य बुलेटिन में उनके पति के शरीर में पोटेशियम के स्तर से संबंधित वास्तविक संख्या को जानबूझकर छिपाया गया है।
उन्होंने अस्पताल के भीतर के हालात बयां करते हुए निम्नलिखित गंभीर आरोप लगाए हैं:
- स्थानांतरण की अनुमति नहीं: बार-बार की गई अपीलों के बावजूद अस्पताल प्रशासन न तो सोनम वांगचुक को छुट्टी दे रहा है और न ही उन्हें हमारी पसंद के किसी निजी अस्पताल में ले जाने की इजाजत दे रहा है।
- भारी पुलिस बल की तैनाती: अस्पताल के जिस फ्लोर पर वांगचुक भर्ती हैं, वहां लगभग 30 पुलिसकर्मी मुस्तैद हैं। इसके अलावा, पूरे अस्पताल परिसर में 100 से अधिक पुलिसकर्मियों का कड़ा पहरा लगा हुआ है।
- आवाजाही पर प्रतिबंध: सुरक्षा के इस भारी-भरकम बंदोबस्त के कारण परिवार और शुभचिंतकों की आवाजाही पर अत्यधिक प्रतिबंध लगा दिए गए हैं।
- अवैध बंदी बनाना: गीतांजलि ने तीखे शब्दों में कहा कि यह कोई चिकित्सकीय देखभाल या इलाज नहीं है, बल्कि एक प्रकार की गैर-कानूनी हिरासत है।
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