खाड़ी में बढ़ते खतरे के बीच भारत कैसे कर रहा अपने नाविकों की हिफाजत? पूरी कहानी समझिए भारत एक महीने पहले 20
ईरान-अमेरिका टकराव से खाड़ी में तनाव बढ़ने के बाद भारत ने अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षा के लिए कूटनीतिक और समुद्री मोर्चे पर कोशिशें तेज कर दी हैं। विदेश मंत्रालय ने इस हफ्ते दूसरी बार अमेरिकी प्रतिनिधि को तलब किया है।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव की वजह से खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है, और इसी माहौल में भारत ने अपने समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को लेकर कूटनीतिक तथा समुद्री दोनों स्तरों पर अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait Of Hormuz) में काम कर रहे भारतीय नाविक बार-बार अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सैन्य कार्रवाइयों की चपेट में आ रहे हैं, जिसने भारत की चिंता को और गहरा कर दिया है। अब खाड़ी और अरब सागर से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों पर मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा देश की प्राथमिकताओं में शुमार हो गई है।

विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिनिधि को तलब किया

भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को इस सप्ताह दूसरी बार अमेरिकी दूतावास के उप मिशन प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया। यह कदम उस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उठाया गया, जिसमें ओमान तट के पास लगभग 20 भारतीय चालक दल वाले एक व्यापारी जहाज पर हमले की बात कही गई थी। इस घटना ने भारत सरकार की चिंता को और बढ़ा दिया है।

लगातार हो रहे हमलों से गहराई चिंता

प्राप्त जानकारी के अनुसार, विदेश मंत्रालय में अमेरिकी मामलों के अतिरिक्त सचिव ने जेसन मीक्स से मुलाकात कर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर भारत की गहरी चिंता जताई। भारत ने स्पष्ट किया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिक व्यापारी जहाजों को नुकसान से बचाना बेहद जरूरी है।

दुनिया के समुद्री कर्मियों में करीब 10 फीसदी भारतीय

उल्लेखनीय है कि खाड़ी क्षेत्र में ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार पहले से ही बड़ी चुनौतियों से जूझ रहा है। बढ़ते तनाव को देखते हुए कई शिपिंग कंपनियां अपने समुद्री मार्गों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा में जुटी हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दुनिया के कुल समुद्री कर्मियों में लगभग 10 फीसदी भारतीय हैं। हजारों भारतीय नाविक कार्गो शिप, तेल टैंकरों और अन्य व्यापारी जहाजों पर तैनात हैं, जो नियमित रूप से खाड़ी और अरब सागर के रणनीतिक समुद्री रास्तों से गुजरते हैं।

नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा की मांग तेज

एमटी जलवीर (MT Jalveer) पर हाल ही में हुए कथित मिसाइल हमले ने नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के हमलों में कई भारतीय नाविक प्रभावित हुए हैं। इसी वजह से यह मांग भी जोर पकड़ रही है कि सैन्य अभियानों में अधिक पारदर्शिता बरती जाए और व्यावसायिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

समुद्री सुरक्षा तंत्र बनाने पर जोर

ध्यान देने योग्य है कि जहाजों पर बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत एक पारदर्शी समुद्री डी-कॉन्फ्लिक्शन मैकेनिज्म (Maritime De-confliction Mechanism) बनाने की पुरजोर वकालत कर रहा है। इसके तहत सैन्य बलों और वाणिज्यिक शिपिंग कंपनियों के बीच बेहतर तालमेल कायम किया जा सकेगा, ताकि संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय चालक दल वाले जहाज अनजाने में निशाना न बनें।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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