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2 घंटे पहले
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विचारों
रिलायंस जियो की डिजिटल क्रांति और विकास की कहानी
भारत में तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया और किफायती इंटरनेट के दौर में रिलायंस जियो का नाम सबसे अग्रणी रहा है। आम नागरिकों के लिए डेटा और कनेक्टिविटी को सुलभ बनाने के सफर में कंपनी की भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। अब जब कंपनी अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ के लिए कमर कस रही है, तब जियो प्लेटफॉर्म्स के वरिष्ठ अधिकारियों ने कंपनी की नींव, इसके मिशन और वित्तीय प्रदर्शन के आंकड़ों को सार्वजनिक किया है। जियो के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने साफ किया है कि कंपनी का मुख्य लक्ष्य प्रत्येक भारतीय तक हाई क्वालिटी और किफायती डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी का EBITDA 76,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को छू चुका है।
डिजिटल इंडिया के संकल्प के साथ जियो का तालमेल
आईपीओ से जुड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आकाश अंबानी ने विस्तार से बताया कि जियो का मिशन केवल व्यापार करना नहीं, बल्कि भारत के हर घर और नागरिक को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है। उन्होंने जोर दिया कि जियो पूरी तरह से प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रही है। कंपनी का प्रयास है कि वह इस बड़े राष्ट्रीय विजन में एक मुख्य भागीदार के रूप में अपनी भूमिका निभाती रहे।
तीन साल में 17.8 प्रतिशत की EBITDA बढ़त
आकाश अंबानी ने कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए बताया कि जियो ने पिछले तीन वर्षों के भीतर 17.8 प्रतिशत की प्रभावशाली EBITDA ग्रोथ हासिल की है। यह वृद्धि कंपनी द्वारा भारत की डिजिटल प्रगति में दिए गए योगदान का परिणाम है। गौर करने वाली बात यह है कि चीन के बाहर जियो के पास दुनिया का सबसे बड़ा 5G यूजर बेस मौजूद है। कंपनी ने लगभग तीन वर्ष पहले 5G सेवाओं की शुरुआत की थी और आज यह एक मजबूत नेटवर्क बन चुकी है।
नवाचार और तकनीकी दक्षता पर जोर
जियो के नवाचार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कंपनी ने अब तक 7,220 से अधिक पेटेंट दाखिल किए हैं। आकाश अंबानी के दावों के अनुसार, पेटेंट फाइलिंग के मामले में रिलायंस जियो वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 कंपनियों में शामिल होने वाली एकमात्र भारतीय फर्म है। इस तकनीकी ताकत के पीछे 12,000 से अधिक कुशल इंजीनियरों की समर्पित टीम है जो निरंतर शोध और विकास में लगी हुई है।
19 महीनों में देशभर में पहुंच
नेटवर्क विस्तार की गति को रेखांकित करते हुए आकाश अंबानी ने बताया कि जियो ने महज 19 महीनों के रिकॉर्ड समय में भारत की 99 प्रतिशत आबादी तक अपनी सेवाओं का विस्तार कर लिया था। कंपनी का भविष्य का इंफ्रास्ट्रक्चर और स्पेक्ट्रम भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम है। अगले पांच सालों के भीतर जियो लगभग 31.4 करोड़ नए मोबाइल ग्राहकों को जोड़ने की संभावना देख रही है। इसमें 10 करोड़ ग्राहक ऐसे हो सकते हैं जो पहली बार सिम कार्ड का उपयोग करेंगे, जबकि 24 करोड़ 2G यूजर 4G और 5G नेटवर्क की ओर रुख कर सकते हैं।
जियो की शुरुआत के पीछे का एक निजी किस्सा
जियो के गठन की प्रेरणा पर बात करते हुए ईशा अंबानी ने 2009-10 के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय वे और आकाश अमेरिका में अपनी कॉलेज की पढ़ाई कर रहे थे। छुट्टियों में घर आने के दौरान ईशा को अपना ऑनलाइन असाइनमेंट जमा करना था, लेकिन इंटरनेट न चलने के कारण वह अपना कार्य पूरा नहीं कर सकीं। इसी अनुभव ने ईशा और आकाश के मन में यह सवाल पैदा किया कि आखिर भारत में वैसी कनेक्टिविटी क्यों नहीं हो सकती जैसी पश्चिमी देशों में है। इसी सोच ने एक डिजिटल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बनाने के विचार को जन्म दिया, जिसका परिणाम 2016 में जियो के लॉन्च के रूप में सामने आया।
दीर्घकालिक दृष्टि और वित्तीय अनुशासन
ईशा अंबानी ने स्पष्ट किया कि रिलायंस का कोई भी कारोबार तात्कालिक मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। कंपनी की वित्तीय रणनीति दो मुख्य आधारों पर टिकी है जिसमें मजबूत बैलेंस शीट बनाए रखना और लगातार नकदी प्रवाह सुनिश्चित करना शामिल है। इसी रणनीति के तहत कंपनी निवेश, विस्तार और मुनाफे के बाद उसे दोबारा व्यापार में लगाने की प्रक्रिया अपनाती है। जियो के प्रस्तावित आईपीओ के चलते यह स्पष्ट बयान कंपनी की भविष्य की योजनाओं को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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